“पूरी रात रोई थी, तब शुभेंदु ने दिया था साथ”, महुआ मोइत्रा के बयान से बंगाल की राजनीति गरमाई

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों लगातार बदलाव और नए समीकरणों की चर्चाएं हो रही हैं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद और चर्चित नेता महुआ मोइत्रा का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को अपना पुराना और अच्छा मित्र बताया।

हालांकि महुआ मोइत्रा और शुभेंदु अधिकारी आज अलग-अलग राजनीतिक दलों में हैं और अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ मुखर दिखाई देते हैं, लेकिन महुआ ने अपने शुरुआती राजनीतिक सफर से जुड़ा एक भावनात्मक अनुभव साझा किया है।

“शुभेंदु अधिकारी ने मुश्किल समय में दिया था साथ”

एक मीडिया इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि जब वह राजनीति में अपने शुरुआती दौर से गुजर रही थीं, तब शुभेंदु अधिकारी ने उनका काफी सहयोग किया था। उन्होंने बताया कि करीमपुर विधानसभा चुनाव के दौरान शुभेंदु अधिकारी उनके समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे और संगठनात्मक स्तर पर भी मदद करते थे।

महुआ के अनुसार, जब लोकसभा चुनाव के लिए टिकट को लेकर अनिश्चितता का दौर था, तब वह काफी भावुक हो गई थीं। उस समय शुभेंदु अधिकारी ने उनका मनोबल बढ़ाया और उनका हौसला बनाए रखा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन कुछ व्यक्तिगत रिश्ते और अनुभव हमेशा याद रहते हैं।

TMC और BJP में आज हैं आमने-सामने

महुआ मोइत्रा और शुभेंदु अधिकारी वर्तमान में बंगाल की राजनीति के दो अलग-अलग ध्रुवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। महुआ जहां तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख आवाजों में गिनी जाती हैं, वहीं शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।

गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी कभी तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में माने जाते थे। वर्ष 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था और उसके बाद से बंगाल की राजनीति में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है।

2016 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी यादें

महुआ मोइत्रा ने वर्ष 2016 में करीमपुर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था। उस समय शुभेंदु अधिकारी पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। महुआ ने उसी दौर को याद करते हुए कहा कि जब कई अन्य नेता सक्रिय नहीं थे, तब शुभेंदु ने चुनावी अभियान में उनका सहयोग किया।

राजनीतिक बयान या सिर्फ पुरानी यादें?

महुआ मोइत्रा के इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि उन्होंने कहीं भी पार्टी बदलने या किसी नए राजनीतिक कदम का संकेत नहीं दिया है, लेकिन एक प्रमुख विपक्षी नेता की सार्वजनिक सराहना ने राजनीतिक हलकों का ध्यान जरूर खींचा है।

फिलहाल इसे महुआ मोइत्रा द्वारा अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती अनुभवों को साझा करने के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन बंगाल की राजनीति में चल रहे घटनाक्रमों के बीच यह बयान चर्चा और अटकलों को जरूर हवा दे रहा है।