Haridwar becomes the war room of Mission 2027, will the political mathematics change?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) आगामी Assembly Election 2027 की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी ने “Mission 2027” का औपचारिक आगाज 7 मार्च को हरिद्वार से करने का फैसला किया है। इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah हरिद्वार में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ अहम बैठक भी करेंगे।
सवाल उठ रहा है कि आखिर Haridwar को ही इस राजनीतिक अभियान की लॉन्चिंग के लिए क्यों चुना गया?
2022 की हार का हिसाब चुकता करने की तैयारी
विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को हरिद्वार जिले में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। राज्य में सत्ता में वापसी के बावजूद हरिद्वार की 11 विधानसभा सीटों में से पार्टी सिर्फ 3 सीटें ही जीत पाई।
इसके विपरीत, Indian National Congress ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की और बाद में मंगलौर उपचुनाव में एक और सीट अपने नाम कर ली। इस तरह जिले में कांग्रेस की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
हालांकि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हरिद्वार में प्रदर्शन सुधारा, लेकिन पार्टी मानती है कि असली परीक्षा Assembly Election 2027 में ही होगी। यही वजह है कि हरिद्वार को Mission 2027 का शुरुआती केंद्र बनाया गया है।
Government @ 4 Years Celebration से जुड़ी रणनीति
राज्य सरकार के चार साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत भी हरिद्वार से की जा रही है। यह कदम सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी political strategy का हिस्सा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अमित शाह जनसभा के अलावा उत्तराखंड भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ closed-door meeting भी करेंगे, जिसमें बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक की चुनावी रणनीति (Election Roadmap) तय की जाएगी।
Haridwar: सियासी और धार्मिक दृष्टि से अहम
हरिद्वार न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी यह उत्तराखंड का अहम जिला माना जाता है। यहां की सामाजिक संरचना, शहरी-ग्रामीण संतुलन और विभिन्न वर्गों की मौजूदगी इसे एक politically sensitive district बनाती है।
2022 के चुनाव में भाजपा को यहां मिली सीमित सफलता ने पार्टी नेतृत्व को संदेश दे दिया कि Mission 2027 में हरिद्वार की अनदेखी भारी पड़ सकती है। इसलिए अब हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस की रणनीति अपनाई जा रही है।
सीटों का गणित: किसके पास कितनी ताकत?
2022 विधानसभा चुनाव के बाद हरिद्वार जिले में राजनीतिक स्थिति इस प्रकार रही:
भाजपा: हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर और रुड़की – कुल 3 सीटें
कांग्रेस: ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, हरिद्वार ग्रामीण और मंगलौर – कुल 6 सीटें
अन्य: एक सीट बसपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार
यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भाजपा को 2027 में बेहतर प्रदर्शन के लिए यहां आक्रामक रणनीति अपनानी होगी।
Mission 2027: क्या बदलेगा सियासी समीकरण?
Mission 2027 के तहत भाजपा का लक्ष्य न केवल सत्ता में वापसी है, बल्कि हर जिले में संगठनात्मक मजबूती भी है। हरिद्वार से शुरुआत कर पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह कमजोर कड़ियों को मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
7 मार्च की जनसभा और रणनीतिक बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि भाजपा हरिद्वार में ground-level mobilization, booth management और voter outreach campaign को किस तरह तेज करने वाली है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या हरिद्वार से शुरू हुआ यह चुनावी शंखनाद 2027 में भाजपा के लिए जीत की नई कहानी लिख पाएगा।