Does Taj Mahal belong to Waqf Board or the government? Know the full story of the dispute
भारत के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में से एक, ताज महल (Taj Mahal) को प्यार की निशानी और बेहतरीन वास्तुकला का प्रतीक माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसके असली मालिकाना हक को लेकर बहस छिड़ गई है। यह सवाल, जो सरल लग सकता है, कानूनी विवादों, राजनीतिक बहसों और धार्मिक दावों का कारण बना। उत्तर प्रदेश Sunni Waqf Board ने ताज महल पर मालिकाना हक जताया, जिससे यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
Waqf Board का दावा:
शुरुआत कहाँ से हुई? 1998 में फिरोजाबाद के एक व्यवसायी इरफान बेदार ने उत्तर प्रदेश Sunni Waqf Board से ताज महल को Waqf संपत्ति घोषित करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण इसका नियंत्रण Waqf Board के पास होना चाहिए। इस मांग के बाद Waqf Board ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) को नोटिस भेजा, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया।
Supreme Court का हस्तक्षेप
2004 में बेदार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ताज महल का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की मांग की। हाईकोर्ट ने Waqf Board को मामले को गंभीरता से लेने को कहा और 2005 में Board ने ताज महल को Waqf संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर लिया। ASI ने Supreme Court में अपील की, जिसके बाद कोर्ट ने Waqf Board से सबूत मांगे कि शाहजहां ने ताज महल को वाकई Waqf संपत्ति घोषित किया था।
राजनीतिक विवाद और बढ़ती बहस
2014 में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने ताज महल को Waqf Board की संपत्ति घोषित करने का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि शाहजहां और मुमताज़ महल की कब्रों के कारण यह Board के अंतर्गत आना चाहिए। इस बयान ने विवाद को और बढ़ाया। इसी दौरान Shia समुदाय ने भी दावा किया कि मुमताज़ महल Shia मुस्लिम थीं, इसलिए ताज महल का Shia समुदाय से खास संबंध है।
Supreme Court की कड़ी टिप्पणी
2018 में Supreme Court ने Waqf Board से ताज महल पर दावा साबित करने के लिए शाहजहां द्वारा हस्ताक्षरित मूल दस्तावेज मांगे। न्यायालय ने सख्त लहजे में कहा, “ताज महल का मालिकाना हक Waqf Board के पास है, यह कौन मानेगा?” Waqf Board का तर्क था कि दो प्रमुख मुस्लिम कब्रों की मौजूदगी के कारण यह Waqf संपत्ति है, लेकिन कोर्ट ने ठोस सबूत की मांग की।
Waqf Board का दावा वापस
2018 के मध्य में Waqf Board ने सुप्रीम कोर्ट के सामने स्वीकार किया कि ताज महल को Waqf संपत्ति साबित करने के लिए उनके पास दस्तावेज नहीं हैं। Board ने कहा कि ताज महल “अल्लाह की संपत्ति” है, लेकिन प्रबंधन का अधिकार Waqf Board के पास होना चाहिए। ASI ने इस पर कड़ा विरोध जताया, यह चेतावनी दी कि इससे लाल किला और फतेहपुर सीकरी जैसे अन्य स्मारकों पर भी दावे किए जा सकते हैं।
ताज महल का मालिकाना हक किसके पास है, यह सवाल आज भी बहस का विषय है। कानूनी लड़ाई के बावजूद, यह भारत की धरोहर और विश्व धरोहर स्थल के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में है।