Dhami government's stern message: Recommendation for dismissal of IAS officers involved in land scam.
उत्तराखंड के चर्चित Haridwar Land Scam मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विजिलेंस जांच में भूमि खरीद प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बाद सरकार ने अधिकारियों और भूमि विक्रेताओं समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही मामले में जिम्मेदार पाए गए दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।
पूर्व नगर आयुक्त के खिलाफ बर्खास्तगी की संस्तुति
जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। सरकार का मानना है कि भूमि खरीद प्रक्रिया में गंभीर स्तर की अनियमितताएं हुईं, जिनकी जवाबदेही संबंधित अधिकारियों पर बनती है।
मामले में आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा जाएगा।
पूर्व जिलाधिकारी पर मेजर पेनाल्टी की तैयारी
तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार ने उन्हें अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए Major Penalty Proceedings चलाने का निर्णय लिया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की विस्तृत रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजी जा रही है।
SDM के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई
भूमि खरीद प्रकरण में उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई का फैसला लिया गया है। उनके सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के साथ-साथ तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
10 लोगों के खिलाफ दर्ज होगा केस
सरकार ने इस मामले में कुल 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अनुमति दी है। इनमें तत्कालीन नगर निगम अधिकारियों के अलावा भूमि विक्रेता भी शामिल हैं।
जिन लोगों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त, कर अधीक्षक, सहायक अभियंता, संपत्ति लिपिक, मानचित्रकार और भूमि विक्रेता शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि भूमि खरीद प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी कर सरकारी हितों को नुकसान पहुंचाया गया।
शुरुआती जांच के बाद शुरू हुई कार्रवाई
जैसे ही Haridwar Municipal Corporation Land Purchase Case सामने आया, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया था।
प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विस्तृत जांच और विशेष ऑडिट कराया गया, जिसमें पूरे प्रकरण की गहराई से समीक्षा की गई।
भ्रष्टाचार पर Zero Tolerance Policy
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में Zero Tolerance Policy पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन में Transparency, Accountability और Good Governance सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
सरकार का संदेश साफ है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में हुई यह कार्रवाई उत्तराखंड की हालिया सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में गिनी जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सरकारी विभागों में जवाबदेही बढ़ेगी और भविष्य में सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।