Dhami government gives Diwali gift to 80,000 employees; find out who gets how much bonus
उत्तराखंड सरकार ने दिवाली से पहले राज्य के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने करीब 80 हजार अराजपत्रित और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 30 दिन का तदर्थ बोनस देने का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वित्त सचिव डॉ. वी. षणमुगम ने यह आदेश जारी किया। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 1,184 रुपये से लेकर अधिकतम 6,908 रुपये तक बोनस दिया जाएगा।
4800 रुपये ग्रेड पे तक के कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
सरकारी आदेश के मुताबिक, 4,800 रुपये ग्रेड पे यानी पे लेवल-8 तक के अराजपत्रित कर्मचारियों को बोनस का लाभ मिलेगा। इसके लिए कर्मचारी का 31 मार्च 2026 तक कम से कम छह महीने की संतोषजनक सेवा पूरी करना जरूरी है।
जिन कर्मचारियों ने वित्तीय वर्ष में छह महीने से अधिक लेकिन एक साल से कम समय तक काम किया है, उन्हें सेवा अवधि के अनुपात में बोनस दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले से नियमित अराजपत्रित कर्मचारियों के साथ पात्र दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा।
किसे मिलेगा 1,184 से 6,908 रुपये तक बोनस?
सरकार के आदेश के अनुसार, पात्र स्थायी अराजपत्रित कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये तक बोनस दिया जाएगा। वहीं, निर्धारित शर्तों के तहत पात्र दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 1,184 रुपये का बोनस मिलेगा।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह भी शर्त रखी गई है कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 से 240 दिन तक काम किया हो। बोनस का भुगतान नकद किया जाएगा।
ये कर्मचारी बोनस के दायरे से रहेंगे बाहर
सरकार ने बोनस पाने के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। आदेश के मुताबिक, लेखा वर्ष के दौरान निलंबित रहे कर्मचारी इस सुविधा के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे कर्मचारियों को भी बोनस नहीं दिया जाएगा।
कर्मचारी की सेवा संतोषजनक होना अनिवार्य है। इसलिए केवल निर्धारित ग्रेड पे या सेवा अवधि पूरी कर लेना ही बोनस पाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरण भी दे सकेंगे बोनस
वित्त सचिव ने स्पष्ट किया है कि लाभ की स्थिति में चल रहे स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों के कर्मचारी भी तदर्थ बोनस के पात्र हो सकते हैं। हालांकि, इन संस्थाओं के कर्मचारियों को बोनस का भुगतान संबंधित निकाय या प्राधिकरण अपने संसाधनों से करेगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अलग से कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा।
सरकार के इस फैसले से दिवाली से पहले हजारों कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।