Dehradun's renowned poet Zia Nahtauri passes away; served Hindi-Urdu literature for 60 years.
देहरादून के जाने-माने वरिष्ठ शायर जिया नहटौरी का 12 अक्टूबर 2026 की सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके इंतकाल की खबर से देहरादून समेत साहित्य और शायरी की दुनिया में शोक की लहर है। जिया नहटौरी ने करीब छह दशक तक हिंदी और उर्दू साहित्य की सेवा की और अपनी शायरी, नातिया कलाम तथा दिलकश तरन्नुम से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई।
लंबे समय से बीमार थे जिया नहटौरी
जिया नहटौरी ने देहरादून के मेहूंवाला क्षेत्र में अंतिम सांस ली। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के ऐतिहासिक कस्बे नहटौर से ताल्लुक रखते थे। उर्दू मुशायरों में उनकी अलग पहचान थी और देश-विदेश में आयोजित कई मुशायरों में उन्होंने अपनी संजीदा शायरी से श्रोताओं को प्रभावित किया।
सादगी और खुद्दारी के साथ गुजारी जिंदगी
जिया साहब अपनी शायरी के साथ-साथ अदब से लगाव और साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने सादगी और खुद्दारी के साथ जीवन बिताया। देहरादून में उन्होंने हजारों लोगों को उर्दू और फाइन आर्ट्स की शिक्षा देने में योगदान दिया। साथ ही, उन्होंने सैकड़ों शायरों को मंच और पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
साहित्य जगत में लंबे योगदान को किया जाएगा याद
जिया नहटौरी का जाना देहरादून के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। हिंदी-उर्दू अदब के प्रति उनका समर्पण, मुशायरों में उनकी मौजूदगी और नए शायरों को आगे बढ़ाने का उनका प्रयास लंबे समय तक याद किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे मेहूंवाला मस्जिद के पास उनके अंतिम संस्कार की रस्में अदा की गईं।