मसूरी में विद्युत विभाग और नगर पालिका के बीच ‘बिल युद्ध’, जनता बनी पीड़ित

मसूरी/ पहाड़ों की रानी मसूरी इन दिनों प्रशासनिक खींचतान का गवाह बन रही है। नगर पालिका और विद्युत विभाग के बीच बकाया राशि को लेकर टकराव इस कदर बढ़ गया कि दोनों विभागों ने एक-दूसरे पर सख्त कार्रवाई करने से भी गुरेज नहीं किया।

मंगलवार देर शाम विद्युत विभाग ने स्ट्रीट लाइटों का कनेक्शन काट दिया, जिससे घंटाघर क्षेत्र में अंधेरा छा गया। इस पर नगर पालिका ने पलटवार करते हुए बुधवार को विद्युत विभाग के कुंज भवन गेस्ट हाउस और विद्युत सब स्टेशन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इस घटनाक्रम के चलते मसूरी में करीब एक घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

विद्युत विभाग का कहना है कि नगर पालिका लंबे समय से स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल जमा नहीं कर रही थी, जिस कारण विभाग को कनेक्शन काटने का फैसला लेना पड़ा। वहीं, नगर पालिका का तर्क है कि विद्युत विभाग बिना किसी नोटिस के ही स्ट्रीट लाइटों की बिजली काट दी, जो नियमों के विरुद्ध है।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने कहा कि विद्युत विभाग की कई संपत्तियां नगर पालिका की भूमि पर स्थित हैं, लेकिन उनका हाउस टैक्स लंबे समय से जमा नहीं किया गया। ऐसे में नगर पालिका ने भी कार्रवाई करते हुए कुंज भवन गेस्ट हाउस और सब स्टेशन को सील कर दिया।

वहीं, विद्युत विभाग के एसडीओ पंकज थपलियाल ने बताया कि नगर पालिका को हाउस टैक्स चुकाने के लिए 18 मार्च को नोटिस दिया गया था, जिसमें 15 दिन का समय था। लेकिन समय पूरा होने से पहले ही नगर पालिका ने बुधवार को बिना सूचना के कुंज भवन पर ताला लगा दिया, जिससे सब स्टेशन के संचालन में दिक्कत आई।

जनता पर पड़ी मार

इस प्रशासनिक तनातनी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को उठानी पड़ी। घंटाघर क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें बंद होने से राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, वहीं कुंज भवन सील होने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई। स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों को मिल-बैठकर इस मुद्दे का हल निकालना चाहिए, ना कि आपसी खींचतान में जनता को परेशान करना चाहिए।

अब क्या होगा?

अब देखना होगा कि दोनों विभाग इस मामले को सुलझाने के लिए कोई समाधान निकालते हैं या फिर आगे भी ऐसे ही एक-दूसरे पर एक्शन लेते रहेंगे। जनता की उम्मीद है कि जल्द ही इस विवाद का हल निकले और मसूरी की गलियों में फिर से रोशनी बिखरे।