Relief for man accused of stealing offerings at Badrinath Dham; Pramod Nautiyal had been in jail since July 12
बदरीनाथ धाम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप में जेल में बंद प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए सशर्त रिहाई का आदेश दिया। न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। प्रमोद नौटियाल को पुलिस ने 12 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में बंद थे।
क्या है बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला?
मामले के अनुसार, इस साल बदरीनाथ थाने में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5), 317(2) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि मंदिर में ‘थाली भेंट गणना’ के दौरान वह कथित तौर पर कुछ धनराशि लेते हुए दिखाई दिए थे। इसी आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी।
गिरफ्तारी के 16 दिन बाद दिखाई गई पांच हजार रुपये की बरामदगी
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और कथित बरामदगी के बीच के समयांतराल को अहम आधार बनाया। बचाव पक्ष के अनुसार, प्रमोद नौटियाल को 12 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनकी निशानदेही पर पांच हजार रुपये की बरामदगी 28 जुलाई 2026 को दिखाई गई। यह रकम बदरीनाथ मंदिर की एक धर्मशाला के कमरे से बरामद होने का दावा किया गया था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि धर्मशाला सार्वजनिक स्थान है, जहां श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना रहता है। आरोपी के आवास से शालिग्राम के अलावा कोई अन्य आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई थी। यह भी बताया गया कि प्रमोद नौटियाल देहरादून के स्थायी निवासी हैं।
जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने की दलील
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ऐसे में आरोपी के लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे की सुनवाई में देरी होने की आशंका है। इन तथ्यों को भी जमानत के पक्ष में रखा गया।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने आरोपपत्र दाखिल होने और गिरफ्तारी के काफी समय बाद कथित बरामदगी किए जाने के तथ्यों से इनकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने इन आधारों पर दी जमानत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपों की प्रकृति, आरोपी की हिरासत की अवधि, गिरफ्तारी और कथित बरामदगी के बीच के अंतर तथा मामले की अन्य परिस्थितियों पर विचार किया। इसके बाद अदालत ने प्रमोद नौटियाल की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देने के आदेश का मुकदमे के अंतिम फैसले या मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी ट्रायल के दौरान सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर अलग से विचार किया जाएगा।
जमानत के साथ लगाईं पांच शर्तें
हाईकोर्ट ने प्रमोद नौटियाल को जमानत देते समय पांच प्रमुख शर्तें भी लगाई हैं। उन्हें गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी। वह मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे। अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे। उन्हें मुकदमे की सुनवाई में पूरा सहयोग करना होगा। इसके अलावा, अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर जांच अधिकारी तथा अदालत को उपलब्ध कराना होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो अभियोजन पक्ष उनकी जमानत रद्द करने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है।
जुलाई 2026 में सामने आया बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी का यह मामला काफी चर्चा में रहा था। अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आरोपी को निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए मुकदमे की सुनवाई में शामिल होना होगा।