सियाचिन में काशीपुर के नायब सूबेदार रमेश रावत शहीद, दो महीने तक अस्पताल में चला इलाज

उत्तराखंड के काशीपुर निवासी नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। वह सियाचिन ग्लेशियर में 16वीं गढ़वाल राइफल्स की बी कंपनी में तैनात थे। अत्यधिक ठंड और माइनस तापमान के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जमने के बाद उन्हें सेना के हेलीकॉप्टर से कमांड अस्पताल, चंडीगढ़ पहुंचाया गया था। यहां करीब दो महीने तक उनका उपचार चला, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर काशीपुर पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन की खबर से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर है।

सियाचिन में बिगड़ी थी तबीयत, चंडीगढ़ में चल रहा था इलाज

नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत सियाचिन ग्लेशियर में देश की सुरक्षा में तैनात थे। वहां अत्यधिक ठंड और माइनस तापमान के बीच उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। बताया गया कि उनके मस्तिष्क में रक्त का थक्का जम गया था।

गंभीर हालत को देखते हुए सेना ने उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए कमांड अस्पताल, चंडीगढ़ पहुंचाया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में करीब दो महीने तक उनका इलाज चला। हालांकि, लंबे उपचार के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

सैन्य सम्मान के साथ निकली अंतिम यात्रा

गुरुवार सुबह जैसे ही रमेश रावत का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पूर्व सैनिक और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

इसके बाद उनके घर से सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। रास्ते में लोगों ने पुष्प वर्षा कर वीर जवान को श्रद्धांजलि दी। ढेलापुर घाट पर सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पत्नी, बेटा और बेटी को छोड़ गए पीछे

नायब सूबेदार रमेश सिंह रावत के परिवार में उनकी मां राजेश्वरी, पिता ख्याति सिंह रावत, पत्नी भारती, बेटा समीर और बेटी दीया हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पूर्व सैनिक संगठन काशीपुर के अध्यक्ष चंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश के लिए रमेश रावत का योगदान और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

जनप्रतिनिधियों और पूर्व सैनिकों ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम विदाई के दौरान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, महापौर दीपक बाली, पार्षद संजय शर्मा, एसडीएम अभय प्रताप सिंह और तहसीलदार पंकज चंदोला समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

सेना के स्टेशन हेडक्वार्टर का फ्यूनरल गार्ड, 16वीं गढ़वाल राइफल्स के जवान, स्थानीय पुलिस और काशीपुर, कुंडेश्वरी तथा पीरूमदारा के पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने नम आंखों से वीर जवान को अंतिम विदाई दी।