अग्निवीरों की नौकरी बढ़ने के बाद परिजनों ने उठाई बड़ी मांग, बोले- कम से कम 15 साल हो सेवा

केंद्र सरकार के अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने के फैसले से उत्तराखंड के करीब 1200 जवानों को लाभ मिलने की संभावना है। राज्य में इस समय लगभग 4200 युवा अग्निवीर के रूप में सेना में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 800 से अधिक अग्निवीर इस साल दिसंबर में चार साल का कार्यकाल पूरा कर घर लौटने वाले थे। हालांकि, सरकार के नए फैसले के बाद उनके सेवाकाल को लेकर स्थिति बदल सकती है। इस बीच अग्निवीरों के परिजनों ने दो साल के विस्तार को पर्याप्त नहीं बताते हुए स्थायी नियुक्ति और कम से कम 15 साल की सेवा का अवसर देने की मांग उठाई है।

उत्तराखंड के 1200 अग्निवीरों को मिल सकता है लाभ

अग्निवीरों को दो साल का सेवा विस्तार देने के फैसले के दायरे में उत्तराखंड के करीब 1200 जवान आ सकते हैं। इनमें नैनीताल जिले के 144 अग्निवीर भी शामिल हैं, जो जनवरी 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले थे।

जानकारी के मुताबिक, नैनीताल जिले के पहले बैच के 123 अग्निवीर 31 दिसंबर 2026 को और दूसरे बैच के 21 अग्निवीर 31 जनवरी 2027 को चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले थे। सैनिक कल्याण विभाग के सेवानिवृत्त कर्नल अधिकारी रमेश भट्ट ने यह जानकारी दी।

अग्निवीरों के पुनर्वास की जिम्मेदारी सैनिक कल्याण विभाग को

राज्य सरकार ने सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों के रोजगार और पुनर्वास से जुड़ी जिम्मेदारी कार्मिक विभाग से हटाकर सैनिक कल्याण विभाग को सौंप दी है। सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण का प्रावधान कर चुकी है। खासतौर पर समूह-ग के वर्दीधारी पदों की भर्ती में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। इसके अलावा, सरकार ने छह सदस्यीय अग्निवीर प्रकोष्ठ का गठन भी किया था, जिसका कार्यकाल एक साल निर्धारित किया गया था। सेवा विस्तार के नए फैसले के बाद इस प्रकोष्ठ की व्यवस्था में भी संशोधन की जरूरत पड़ सकती है।

सीएम धामी ने केंद्र सरकार का जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्निवीरों को दो साल का ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ देने के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कैबिनेट का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय युवाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, यह फैसला युवाओं के सामर्थ्य पर विश्वास जताने और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को सम्मान देने की दिशा में एक पहल है।

परिजनों की मांग- कम से कम 15 साल हो सेवा अवधि

दो साल के अतिरिक्त सेवा विस्तार के फैसले के बाद अग्निवीरों के परिजनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि पहले से निर्धारित चार साल के कार्यकाल में दो साल और जोड़ने से युवाओं के भविष्य की चिंता पूरी तरह दूर नहीं होगी। परिजनों ने स्थायी नियुक्ति और लंबे समय तक सेना में सेवा का अवसर देने की मांग की है।

हल्द्वानी के शीशमहल निवासी देवेंद्र मेहरा का बेटा लवकुश सिंह करीब डेढ़ साल पहले अग्निवीर बना था। देवेंद्र मेहरा का कहना है कि अग्निवीरों की सेवा अवधि छह साल के बजाय कम से कम 15 साल होनी चाहिए। उनका तर्क है कि अग्निवीरों को पेंशन की सुविधा नहीं मिलती और वेतन भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में केवल दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल उनके भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर पाएगा।

वहीं, हल्द्वानी निवासी कुंवर सिंह के बेटे ने तीन साल पहले अग्निवीर के रूप में सेना में सेवा शुरू की थी। उनका कहना है कि दो साल का एक्सटेंशन देने के बजाय अग्निवीरों को स्थायी किया जाना चाहिए। परिजनों के मुताबिक, नियमित सेवा का अवसर मिलने से युवाओं को रोजगार और भविष्य की स्थिरता दोनों मिल सकेंगी।

पूर्व अग्निवीरों को राज्य में मिल रही हैं ये सुविधाएं

उत्तराखंड सरकार ने सेना से सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े कुछ प्रावधान किए हैं।
– 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण: सरकारी सेवा में समूह-ग के वर्दीधारी पदों की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान है।
– वीर उद्यमी योजना: इस योजना के तहत कुल निर्धारित लाभार्थियों में 10 प्रतिशत स्थान पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए रखे गए हैं।

– स्वरोजगार योजना: विभिन्न मानकों के अनुसार 15 से 30 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।
केंद्र सरकार के सेवा विस्तार के फैसले के बाद अब उत्तराखंड में अग्निवीरों के रोजगार, पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, जवानों के परिजनों की मांग है कि अतिरिक्त सेवा अवधि के साथ-साथ स्थायी नियुक्ति और सामाजिक सुरक्षा पर भी ठोस फैसला लिया जाए।