एक्सप्रेसवे पर सड़क के साथ बनेगा हरित गलियारा, जानें कौन हैं 2.6 करोड़ पौधे लगाने वाले पीपल बाबा

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अपनी बेहतर सड़क और तेज यातायात सुविधा के लिए चर्चा में है। लेकिन इस एक्सप्रेसवे के किनारे हरियाली बढ़ाने की एक अलग मुहिम भी चल रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले स्वामी प्रेम परिवर्तन, जिन्हें ‘पीपल बाबा’ के नाम से जाना जाता है, यहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर रहे हैं। उनका दावा है कि वह अब तक एक्सप्रेसवे के किनारे शीशम के करीब 40 हजार पौधे लगा चुके हैं। अब उनका लक्ष्य अगले साल फरवरी में लगभग चार लाख और पौधे लगाने का है।

कौन हैं पीपल बाबा?

स्वामी प्रेम परिवर्तन को देशभर में ‘पीपल बाबा’ के नाम से जाना जाता है। वह लंबे समय से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़े हैं। उनके मुताबिक, उनकी टीम और चार लाख से अधिक स्वयंसेवक 21 राज्यों के 226 जिलों में अब तक 2.6 करोड़ से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं और उनके संरक्षण का काम कर चुके हैं।

पीपल बाबा का मानना है कि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण और पौधों की देखभाल जरूरी है। वह केवल विरोध प्रदर्शनों तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर हरियाली विकसित करने को प्राथमिकता देते हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 40 हजार पौधे लगाने का दावा

हाल ही में आयोजित हिमालयन ईकोज फेस्टिवल के 11वें संस्करण में पीपल बाबा ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के किनारे अब तक 40 हजार शीशम के पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ये पौधे बड़े होकर सड़क के किनारे हरित गलियारा तैयार करने में मदद करेंगे।

उन्होंने बताया कि अगले साल फरवरी में एक्सप्रेसवे के आसपास करीब चार लाख और पौधे लगाने की योजना है। इस अभियान का उद्देश्य सड़क के किनारे खाली और बंजर पड़ी जमीन पर हरियाली विकसित करना है।

रात में फावड़ा लेकर निकलती है टीम

पीपल बाबा का पौधारोपण करने का तरीका भी चर्चा में रहता है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम बीज और पौधों की व्यवस्था करने के साथ उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की तैयारी पहले ही कर लेती है। इसके बाद रात करीब 10:30 बजे से पौधे लगाने और गड्ढे खोदने का काम शुरू होता है, जो सुबह चार बजे तक चलता है।

उनके मुताबिक, सुबह जब अधिकारी नए पौधों को देखते हैं तो हैरान रह जाते हैं। पीपल बाबा ने कहा कि वह टकराव के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से पर्यावरण संरक्षण का काम करना पसंद करते हैं।

अधिकारियों से अनुमति को लेकर भी बताया अनुभव

एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे लगाने के लिए अनुमति मांगने से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए पीपल बाबा ने बताया कि अधिकारियों ने उनसे कहा था कि वे औपचारिक रूप से अनुमति नहीं दे सकते, लेकिन उनके काम करने के तरीके से परिचित हैं।

उन्होंने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों में समय लगाने के बजाय पौधों, बीजों, परिवहन और अन्य तैयारियों पर ध्यान देते हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए धैर्य और लगातार काम करने की जरूरत है।

पौधारोपण के साथ संरक्षण पर भी जोर

‘घोस्ट्स ऑन पीपल ट्रीज: माई जर्नी फ्रॉम फोकटेल टू फॉरेस्ट्स’ पुस्तक के लेखक पीपल बाबा का कहना है कि केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है, उनकी देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है। उनका अभियान इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित पौधारोपण योजना पूरी होने पर इस क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास हो सकता है। हालांकि, लगाए गए पौधों के जीवित रहने और उनके नियमित रखरखाव पर ही इस मुहिम की वास्तविक सफलता निर्भर करेगी।