केदारनाथ से गंगोत्री तक बर्फबारी, मसूरी में बारिश से बढ़ी ठंड; बदला उत्तराखंड का मौसम

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने करवट ले ली है। गुरुवार सुबह केदारनाथ धाम में बर्फबारी होने से बाबा केदार की नगरी बर्फ की सफेद चादर में ढक गई। बर्फ से ढके मंदिर और आसपास की पहाड़ियों का खूबसूरत नजारा देखकर श्रद्धालु उत्साहित नजर आए। कई श्रद्धालु इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करते दिखे, जबकि कुछ ने सेल्फी लेकर इस पल को यादगार बनाया। हालांकि, बर्फबारी के साथ ही धाम में ठंड भी बढ़ गई है।

केदारनाथ और गंगोत्री में बर्फबारी, निचले इलाकों में बारिश

केदारनाथ धाम के साथ गंगोत्री धाम में भी बर्फबारी शुरू हो गई है। बर्फ गिरने से दोनों धामों में ठंड बढ़ गई है और पहाड़ों पर मौसम का मिजाज बदल गया है। सफेद बर्फ से ढके मंदिर परिसर और आसपास के पहाड़ों का नजारा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

वहीं, रुद्रप्रयाग जिले के निचले क्षेत्रों में भी मौसम का असर दिखाई दिया। जिला मुख्यालय के अलावा उखीमठ, गुप्तकाशी, जखोली और बसुकेदार में सुबह से बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई। मौसम में आए बदलाव के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

कपाट बंद होने से पहले दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु

केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए 11 नवंबर को बंद होने हैं। कपाट बंद होने की तारीख नजदीक आने के साथ ही बाबा केदार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। बर्फबारी और बढ़ती ठंड के बावजूद भक्तों में दर्शन को लेकर उत्साह बना हुआ है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस यात्रा सीजन में अब तक 18 लाख 53 हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं। बुधवार को 8,376 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। इसके साथ ही इस सीजन में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 18,53,032 हो गई है।

मसूरी में बारिश से बढ़ी ठंड, पर्यटन गतिविधियों पर असर

पहाड़ों की रानी मसूरी में भी गुरुवार सुबह से बारिश होने के कारण मौसम ठंडा हो गया। लगातार बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई और इसका असर शहर की सड़कों तथा पर्यटन गतिविधियों पर दिखाई दिया।

बारिश के कारण आम दिनों की तुलना में पर्यटकों की चहल-पहल कम नजर आई। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में एक ओर बर्फबारी से प्राकृतिक नजारे बदल गए हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश और गिरते तापमान ने ठंड बढ़ा दी है। ऐसे में ऊंचाई वाले इलाकों में जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए गर्म कपड़े साथ रखना और स्थानीय मौसम व यात्रा संबंधी निर्देशों की जानकारी लेना जरूरी है।