Jantar Mantar Protest: दिल्ली जाने से रोकने के आरोप, पुलिस के नोटिस और बॉन्ड को लेकर विवाद

Jantar Mantar Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र में पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस उनके घर पहुंची, फोन करके दिल्ली जाने की योजना पूछी और प्रदर्शन में शामिल नहीं होने का लिखित आश्वासन देने को कहा।

कुछ कार्यकर्ताओं ने हिरासत में लिए जाने की कोशिश के आरोप भी लगाए हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारियों ने कुछ स्थानों पर नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि की है, लेकिन राज्य में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उठाए गए।

घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर पूछताछ का आरोप

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के सांताक्रूज इलाके में रहने वाली 31 वर्षीय क्रिएटिव स्ट्रैटेजिस्ट सदफ रजा जैदी ने दावा किया कि पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और 10 अक्टूबर की योजनाओं के बारे में पूछताछ की। उनके मुताबिक, पुलिस ने उनसे यह भी जानना चाहा कि क्या वह ऐसे लोगों को जानती हैं, जो प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली जाने वाले हैं।

जैदी ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस थाने आकर एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जिसमें प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की बात लिखी जानी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस ने संभावित प्रदर्शनकारियों की जानकारी जुटाने और उनकी लाइव लोकेशन मांगने की बात कही। जैदी का मानना है कि इससे पहले नीट से जुड़े एक प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के कारण पुलिस उनसे पूछताछ करने पहुंची थी।

दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का दावा, पुलिस ने किया इनकार

सामाजिक संगठन ‘हम भारत के लोग’ ने आरोप लगाया कि मुंबई के एमआईडीसी पुलिस थाने की ओर से कार्यकर्ता फिरोज मिथिबोरवाला और सलीम सबूवाला को हिरासत में लिया गया। मिथिबोरवाला ने दावा किया कि 2 अक्टूबर से उन्हें बार-बार बुलाया जा रहा था और परेशान किया जा रहा था। उनके अनुसार, उन्हें करीब दो घंटे तक हिरासत में रखा गया और 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में शामिल नहीं होने को कहा गया।
हालांकि, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया। इस मामले में कार्यकर्ताओं के आरोपों और पुलिस के बयान में अंतर सामने आया है।

ट्रेन से दिल्ली जाने वालों से भी पूछताछ का आरोप

ठाणे में रहने वाले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के सदस्य मयूर शर्मा ने बताया कि मुंबई और दिल्ली के पुलिस अधिकारियों ने उन्हें फोन करके यात्रा की योजना के बारे में पूछा। शर्मा के अनुसार, उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि वह दिल्ली किस माध्यम से जा रहे हैं और उनके साथ कितने लोग होंगे।

उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से रोके जाने की आशंका के चलते उन्होंने और उनके एक दोस्त ने बांद्रा टर्मिनस के बजाय बोरीवली से ट्रेन पकड़ी। इसके बाद दिल्ली रेलवे पुलिस की ओर से भी फोन आने का दावा किया गया। शर्मा के मुताबिक, अधिकारी ने उनसे यात्रा का विवरण मांगा और कहा कि पुलिस को सूचना मिली है कि वह 25 लोगों के समूह को दिल्ली ले जा रहे हैं।

हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर पुलिस के इंतजार करने की आशंका के चलते शर्मा ने फरीदाबाद के पास उतरकर मेट्रो से दिल्ली पहुंचने की बात कही। निजामुद्दीन थाने के एसएचओ ने कुछ लोगों को फोन किए जाने की पुष्टि की, लेकिन इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया।

नागपुर में कार्यकर्ताओं को नोटिस, बॉन्ड जमा करने के निर्देश

नागपुर में CJP के स्वयंसेवकों ने भी आरोप लगाया कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कर्मचारियों ने उन्हें फोन करके दिल्ली जाने वाले लोगों की संख्या और उनकी पहचान के बारे में पूछा। रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम दो स्वयंसेवकों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत नोटिस जारी किए गए।

नागपुर के भगवान नगर निवासी कार्यकर्ता भारत बनैत को 6 अक्टूबर को अजनी पुलिस थाने से नोटिस मिला। इसमें पुलिस को मिली कथित गोपनीय जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया कि वह जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा सकते हैं। नोटिस में उनसे यात्रा की तारीख, माध्यम और साथ जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी मांगी गई। जानकारी नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

इसी तरह, नागपुर जिले के कुही के स्वयंसेवक अक्षय रामटेके को भी नोटिस जारी किए जाने की खबर है। इसमें 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन या मार्च में शामिल होने से संबंधित चेतावनी दी गई थी। नोटिस में आशंका जताई गई कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सड़क जाम या सरकारी कामकाज में बाधा जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

रामटेके को पुलिस थाने में उपस्थित होकर लिखित बॉन्ड जमा करने के लिए कहा गया था। इस बॉन्ड में प्रदर्शन में शामिल नहीं होने या सार्वजनिक शांति भंग नहीं करने का आश्वासन देने की बात बताई गई है।
नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने कहा कि किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के उद्देश्य से BNSS की धारा 168 के तहत नोटिस जारी किए जाते हैं।

पुलिस ने किन कानूनी धाराओं का हवाला दिया?

महाराष्ट्र पुलिस के DGP कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 168 पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देती है। वहीं, धारा 170(1) के तहत कुछ निर्धारित परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक गिरफ्तारी का प्रावधान है।

पुलिस का पक्ष है कि संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को देखते हुए कुछ पुलिस आयुक्तालयों और जिला पुलिस अधीक्षकों ने कार्रवाई की। हालांकि, कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पूछताछ और लिखित आश्वासन की मांग के जरिए उन्हें प्रदर्शन में भाग लेने से रोकने की कोशिश की गई।

SIR के खिलाफ जंतर-मंतर तक मार्च का ऐलान

CJP के नेता अभिजीत दीपके ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी 10 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर तक मार्च करेगी। इस प्रदर्शन का उद्देश्य Special Intensive Revision (SIR) को रद्द करने और मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाना है।
दीपके ने कहा कि पार्टी के नेताओं को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तब भी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दिल्ली में सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर देश के लोगों का है और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए।

प्रदर्शन से पहले क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?

SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दलों और संबंधित संगठनों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका पर सवाल उठाए हैं और प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है।

10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कार्यकर्ताओं और पुलिस के दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। जहां कार्यकर्ताओं ने पूछताछ, दबाव और बॉन्ड भरवाने के आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत से जोड़ा है। पूरे मामले में संबंधित नोटिस, पुलिस के आधिकारिक आदेश और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर स्थिति का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा।