'Purification' row echoes from Haldwani to Delhi and Punjab; BJP and Congress lock horns ahead of the 2027 elections.
Haldwani Purification Controversy: हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लेकर हुए कथित ‘शुद्धीकरण’ कार्यक्रम और इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे ने उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है। यह मामला अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी चर्चा में है। कांग्रेस इसे Dalit Dignity और Social Justice से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस पर दलित सम्मान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद कांग्रेस के लिए एक तरफ संगठन को एकजुट करने का अवसर बनकर सामने आया है, तो दूसरी ओर उसके सामने Caste Equation साधने की चुनौती भी है। कांग्रेस को दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ अपने पारंपरिक सवर्ण समर्थन को भी बनाए रखना होगा।
हल्द्वानी से दिल्ली तक पहुंचा राजनीतिक विवाद
हल्द्वानी में हुए कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम और राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष के नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस की पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ इकाइयों ने भी राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विरोध में प्रदर्शन किया। इससे यह मुद्दा Uttarakhand Politics से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को मिला एकजुट होने का मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी गुटबाजी से जूझती रही है। लेकिन हल्द्वानी विवाद ने पार्टी के विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साझा मुद्दे पर एकजुट होने का मौका दिया है।
कांग्रेस अब इस पूरे प्रकरण को Dalit Identity, Constitutional Values और Democracy से जोड़कर सरकार के खिलाफ अभियान के रूप में आगे बढ़ा रही है। पार्टी का मानना है कि इससे उसे दलित समाज के बीच अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी सभा की तुलना में बाद में सामने आया शुद्धीकरण विवाद कहीं अधिक व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
2027 से पहले कांग्रेस के सामने जातीय संतुलन की चुनौती
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए हल्द्वानी विवाद का राजनीतिक असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने इस मुद्दे के जरिए Dalit Vote को अपने पक्ष में मजबूत करने की चुनौती है।
हालांकि, पार्टी के लिए केवल दलित मतदाताओं को साधना पर्याप्त नहीं होगा। उत्तराखंड में कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन आधार विभिन्न सामाजिक समूहों में फैला रहा है। ऐसे में पार्टी को दलित सम्मान और सामाजिक न्याय के मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए अपने अन्य पारंपरिक मतदाताओं के साथ भी संतुलन बनाए रखना होगा।
यही वजह है कि 2027 चुनाव से पहले Caste Politics और Social Equation कांग्रेस की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर उठाए सवाल
भाजपा की ओर से कांग्रेस के आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक दिखावा बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के हल्द्वानी दौरे के दौरान अपेक्षित संख्या में लोगों के नहीं जुटने के बाद जिस तरह से पुलिस कार्यालय में कथित तौर पर भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उचित नहीं था। उन्होंने प्रदेश में शांति, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
रेखा आर्या ने कांग्रेस पर लगाया राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हल्द्वानी के कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम के बाद कांग्रेस Dalit Respect के नाम पर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
रेखा आर्या ने दावा किया कि कुछ दलित युवाओं ने राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कथित धमकियों को लेकर सुरक्षा की चिंता जताई और कानून का सहारा लिया। उन्होंने कांग्रेस से दलित सम्मान जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल न करने की अपील की।
वहीं, समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कांग्रेस पर देहरादून और हल्द्वानी में पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन के दौरान अराजकता फैलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमे को लेकर दूसरे राज्यों में भी प्रदर्शन
हल्द्वानी प्रकरण का असर उत्तराखंड से बाहर भी देखने को मिला। कांग्रेस की पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ इकाइयों ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विरोध में प्रदर्शन किया।
हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। वहीं चंडीगढ़ कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की के नेतृत्व में विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे जाने से रोक दिया।
2027 में किसके पक्ष में जाएगा दलित समीकरण?
हल्द्वानी विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में Dalit Politics को एक बार फिर प्रमुख चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों का मुद्दा बनाकर आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मुद्दे के तौर पर पेश कर रही है।
अब असली परीक्षा 2027 के विधानसभा चुनाव में होगी। कांग्रेस के लिए चुनौती यह होगी कि वह इस मुद्दे के जरिए दलित समाज के बीच समर्थन मजबूत करे, लेकिन साथ ही अपने व्यापक सामाजिक गठजोड़ को भी बनाए रखे। दूसरी ओर भाजपा के सामने कांग्रेस के इस अभियान का राजनीतिक जवाब देने और अपने Social Coalition को मजबूत बनाए रखने की चुनौती होगी।
आने वाले समय में हल्द्वानी विवाद किस तरह चुनावी मुद्दे का रूप लेता है और इसका असर उत्तराखंड के Caste Equation तथा Electoral Politics पर कितना पड़ता है, यह 2027 की चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।