Stampede at Ashokdham in Lakhisarai on Sawan Monday; 7 devotees dead.
बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 कांवरियों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक दर्जन से अधिक श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने घटना में सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों में छह महिलाओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 6 बजे के बाद अशोकधाम मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक बढ़ गई। इसी दौरान मंदिर के बाहर बांस-बल्लियों से बनाई गई बैरिकेडिंग टूट गई। बैरिकेडिंग टूटते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई और कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैरिकेडिंग के पास एक बिजली का पोल भी मौजूद था। बताया जा रहा है कि बैरिकेडिंग का एक हिस्सा टूटकर पोल में फंस गया, जिससे पोल थोड़ा टेढ़ा हो गया। इसके बाद वहां बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। इस अफवाह के बाद श्रद्धालु घबराकर इधर-उधर भागने लगे और देखते ही देखते stampede की स्थिति बन गई।
भगदड़ में कई श्रद्धालु कुचले गए
घबराकर भागने के दौरान कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और उनके ऊपर पीछे से आ रहे लोग गिरते चले गए। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद मंदिर परिसर और अस्पताल में चीख-पुकार का माहौल बन गया।
जिला प्रशासन के साथ स्थानीय लोग भी rescue operation में जुटे हुए हैं। घायलों का इलाज कराया जा रहा है। गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए पटना भेजे जाने की संभावना भी जताई गई है।
दो किलोमीटर तक की गई थी बैरिकेडिंग
बताया गया है कि श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अशोकधाम मंदिर से अशोकधाम हॉल्ट तक करीब दो किलोमीटर की दूरी में बैरिकेडिंग की गई थी। मंदिर परिसर के भीतर पहले से लोहे के पाइप की बैरिकेडिंग मौजूद थी, जबकि बाहर की तरफ बांस-बल्लियों के जरिए रास्ते को नियंत्रित किया गया था।
अशोकधाम मंदिर में पहले भी भगदड़ की घटना सामने आ चुकी है। इसके बावजूद सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ पहुंचने के कारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
एक साथ पहुंचीं दो ट्रेनें, बढ़ गई श्रद्धालुओं की भीड़
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, लखीसराय में एक साथ दो ट्रेनें पहुंचीं। आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में कांवरिए और श्रद्धालु अशोकधाम पहुंचे थे। सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण मंदिर में heavy crowd पहले से ही थी। श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतार में खड़े थे। इसी बीच बैरिकेडिंग टूटने और अफवाह फैलने के बाद स्थिति बेकाबू हो गई।
प्रशासन का कहना है कि Sawan Somwar को देखते हुए पहले से सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से कहीं अधिक होने के कारण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
मंदिर परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
हादसे के बाद लखीसराय के डीएम और अस्पताल में प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं, जबकि एसपी मंदिर परिसर में कैंप कर रहे हैं। घटना के बाद मंदिर में अतिरिक्त security forces की तैनाती की गई है।
डीएम शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, फिलहाल मंदिर परिसर में स्थिति नियंत्रण में है और श्रद्धालु कतारबद्ध होकर जलाभिषेक कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने, राहत एवं बचाव कार्य पूरा करने और मंदिर की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की है।
हादसे की होगी जांच
जिला प्रशासन ने घटना की जांच कराने की बात कही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि भगदड़ की वास्तविक वजह क्या थी और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था में कहां चूक हुई। फिलहाल प्रशासन की ओर से relief and rescue operation पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
सावन की तीसरी सोमवारी पर हुए इस हादसे ने मंदिर की सुरक्षा और crowd management को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करना है।