Will the solar eclipse unravel the biggest mystery surrounding the coronavirus? Scientists to gather crucial data.
Solar Eclipse 2026: साल 2026 का पहला Total Solar Eclipse आज यानी बुधवार को होने जा रहा है। भारत में यह खगोलीय घटना दिखाई नहीं देगी, लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर नजर रखेंगे। खासतौर पर सूर्य के बाहरी वायुमंडल यानी Solar Corona का अध्ययन कर वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि सूर्य की सतह से कहीं ज्यादा गर्म कोरोना के पीछे क्या वजह है। इसी रात आसमान में Perseid Meteor Shower भी अपने चरम पर रहेगा।
चार घंटे से ज्यादा चलेगा Solar Eclipse
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के पूर्व निदेशक और सौर वैज्ञानिक डॉ. वहाबउद्दीन के मुताबिक, भारतीय समयानुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण बुधवार रात करीब 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त तड़के 1:27 बजे समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग चार घंटे 24 मिनट होगी, जबकि इसका अधिकतम पूर्ण चरण करीब 2 मिनट 18 सेकेंड का रहेगा।
हालांकि, भारत से Solar Eclipse 2026 को देखा नहीं जा सकेगा। पूर्ण ग्रहण का रास्ता ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा। वहीं यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कई इलाकों में यह Partial Solar Eclipse के रूप में नजर आएगा।
सूर्य के ‘Corona’ का रहस्य जानेंगे वैज्ञानिक
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य की चमकदार सतह को ढक लेता है। इससे सूर्य का बाहरी वातावरण यानी Corona अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देता है। यही समय वैज्ञानिकों के लिए सूर्य की इस रहस्यमयी परत का अध्ययन करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।
सूर्य की सतह का तापमान लगभग 5,500 डिग्री सेल्सियस बताया जाता है, जबकि कोरोना का तापमान लाखों डिग्री तक पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह सवाल अब भी बड़ी पहेली है कि सूर्य की सतह से दूर स्थित कोरोना इतना ज्यादा गर्म क्यों है।
ग्रहण के दौरान जुटाए जाने वाले Scientific Data से वैज्ञानिक कोरोना की संरचना, तापमान और Magnetic Activity को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश करेंगे। इससे Solar Physics से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशने में मदद मिल सकती है।
Solar Wind को समझने का भी मौका
सूर्य के कोरोना से लगातार आवेशित कणों की धाराएं निकलती हैं, जिन्हें Solar Wind कहा जाता है। सूर्य की गतिविधियों में होने वाला बदलाव पृथ्वी के आसपास के Space Environment को भी प्रभावित कर सकता है।
वैज्ञानिक ग्रहण के दौरान कोरोना में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करके Solar Wind और Space Weather से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने की कोशिश करेंगे। इससे सूर्य की गतिविधियों का पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद मिल सकती है।
आज रात आसमान में दिखेगा Perseid Meteor Shower
सूर्य ग्रहण के साथ बुधवार रात से गुरुवार तड़के तक Perseid Meteor Shower 2026 भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। 12-13 अगस्त की रात पर्सीड उल्कापात अपने चरम पर होगा।
अमावस्या होने के कारण चांदनी कम रहने से आसमान में चमकती उल्काओं यानी ‘टूटते तारों’ का नजारा अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे सकता है। हालांकि, मौसम और बादल इस खगोलीय घटना को देखने में बाधा बन सकते हैं।
ARIES के डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, यह रोशनी Swift-Tuttle Comet से निकले कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने और घर्षण के कारण पैदा होती है। अच्छी बात यह है कि Perseid Meteor Shower को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।
तापमान और हवा में बदलाव पर भी नजर
Solar Eclipse के दौरान कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है। वैज्ञानिक इस दौरान Temperature, Wind और Atmospheric Conditions में होने वाले बदलावों को भी रिकॉर्ड करते हैं।
ग्रहण से पहले, दौरान और बाद में जुटाए गए आंकड़ों की तुलना करके यह समझने की कोशिश की जाएगी कि सूर्य की रोशनी में अचानक आई कमी का स्थानीय वातावरण पर कितना असर पड़ता है।