Snow Leopard का ‘लव ट्रैक’ आया सामने, पार्टनर और भोजन के लिए पार कर रहे देश की सीमा

Snow Leopard News: हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले हिम तेंदुओं को लेकर एक नई रिसर्च में बेहद दिलचस्प जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि Snow Leopards केवल भोजन की तलाश में ही लंबी दूरी तय नहीं करते, बल्कि उपयुक्त पार्टनर और बेहतर आवास की तलाश में International Borders भी पार कर जाते हैं। GPS-Satellite Collar Tracking के जरिए की गई निगरानी में हिम तेंदुओं की ऐसी गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिससे उनके व्यवहार और संरक्षण को लेकर नई जानकारियां मिली हैं।

नेपाल से भारत और चीन तक आवाजाही

अध्ययन के दौरान नेपाल के Kangchenjunga National Park में चार वयस्क हिम तेंदुओं पर GPS-Satellite Collar लगाए गए। इनमें एक नर और तीन मादा हिम तेंदुए शामिल थे। कई महीनों तक उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई।

रिसर्च में सामने आया कि चार में से तीन हिम तेंदुए कई बार नेपाल से निकलकर भारत और चीन के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहुंचे और फिर वापस नेपाल लौट आए। इनमें से कुछ ने अपनी सामान्य गतिविधि सीमा से करीब तीन गुना तक अधिक दूरी तय की।

1000 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा रहा एक Snow Leopard का Activity Range

वैज्ञानिकों ने हिम तेंदुओं की लोकेशन को कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर रिकॉर्ड किया। इसके आधार पर उनके Movement Pattern और Home Range का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि तीन हिम तेंदुओं ने अपनी Tracking अवधि का करीब 10 से 34 प्रतिशत समय पड़ोसी देशों में बिताया। वहीं एक नर हिम तेंदुए का Activity Range 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक पाया गया। आमतौर पर हिम तेंदुए का गतिविधि क्षेत्र लगभग 300 वर्ग किलोमीटर के आसपास माना जाता है।

यह आंकड़ा बताता है कि भोजन, साथी और अनुकूल आवास की तलाश में ये दुर्लभ वन्यजीव कितनी लंबी दूरी तय कर सकते हैं।

सिर्फ भोजन नहीं, Partner की तलाश भी सीमा पार करने की वजह

रिसर्च में सामने आया कि हिम तेंदुओं की Cross-Border Movement के पीछे केवल भोजन की तलाश ही वजह नहीं है। उपयुक्त Habitat और प्रजनन के लिए साथी की तलाश भी उनकी आवाजाही का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है।

हिम तेंदुओं के लिए ऐसी सीमाएं कोई स्थायी बाधा नहीं हैं। भारत, नेपाल और चीन से जुड़े ऊंचे हिमालयी क्षेत्र उनके प्राकृतिक Habitat का हिस्सा हैं। इसलिए एक देश से दूसरे देश में उनकी आवाजाही उनके प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा हो सकती है।

भरल और हिमालयी तहर हैं पसंदीदा शिकार

हिम तेंदुओं के प्रमुख शिकार में भरल (Himalayan Blue Sheep) और Himalayan Tahr शामिल हैं। इसके अलावा उनके भोजन में आइबेक्स, आर्गली, कस्तूरी मृग, मारमॉट, पिका, जंगली खरगोश, स्नो कॉक और चकोर जैसे वन्यजीव भी शामिल होते हैं।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इन शिकार प्रजातियों की मौजूदगी हिम तेंदुओं को लंबी दूरी तय करने के लिए प्रेरित कर सकती है। भारत, नेपाल और चीन से जुड़े हिमालयी इलाकों में ऐसे वन्यजीवों का Habitat मौजूद है, जिससे इन क्षेत्रों में Snow Leopard Movement की संभावना बढ़ जाती है।

उत्तराखंड के लिए क्यों अहम है यह Research?

यह अध्ययन उत्तराखंड के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य का उच्च हिमालयी क्षेत्र नेपाल और चीन की सीमाओं से जुड़ा हुआ है। हिम तेंदुओं की सीमा-पार आवाजाही सामने आने के बाद इनके Wildlife Corridors को सुरक्षित रखने की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत, नेपाल और चीन को हिम तेंदुओं के प्राकृतिक आवास और उनके Transboundary Movement Routes की सुरक्षा के लिए आपसी समन्वय बढ़ाना चाहिए। साथ ही इन क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी और संरक्षण रणनीति विकसित करने की आवश्यकता है।

GPS Collar से पहली बार मिला वैज्ञानिक प्रमाण

वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिलाल हबीब के मुताबिक, भारत, नेपाल और चीन की सीमाएं कई स्थानों पर एक-दूसरे के करीब आती हैं। ऐसे में वन्यजीवों का सीमा पार जाना पहले भी सामने आता रहा है, लेकिन Radio Collar और GPS Tracking से इस तरह की गतिविधियों का वैज्ञानिक प्रमाण हासिल करने में मदद मिलती है।

इस तरह के अध्ययन से हिम तेंदुओं के Movement, Habitat, Food Pattern और Breeding Behaviour को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही अलग-अलग देशों के बीच संरक्षण को लेकर संयुक्त रणनीति तैयार करने का रास्ता भी मजबूत हो सकता है।

संरक्षण के लिए बदलनी होगी रणनीति

नई रिसर्च यह संकेत देती है कि हिम तेंदुओं का संरक्षण केवल किसी एक देश की सीमा तक सीमित रखकर नहीं किया जा सकता। उनके प्राकृतिक आवागमन वाले क्षेत्रों को एक बड़े Transboundary Wildlife Landscape के रूप में देखने की जरूरत है।

यदि भारत, नेपाल और चीन मिलकर हिम तेंदुओं के Habitat और Wildlife Corridors की सुरक्षा करते हैं, तो इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण को और प्रभावी बनाया जा सकता है। GPS-Satellite Tracking से सामने आई यह जानकारी भविष्य की Snow Leopard Conservation Strategy के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।