Badrinath Donation Theft: Probe into deleted CCTV data intensifies; SIT records statements of 12 key witnesses.
Badrinath Donation Theft Case की जांच लगातार तेज होती जा रही है। पुलिस की Special Investigation Team (SIT) अब मामले से जुड़े डिजिटल सबूतों पर फोकस कर रही है। जांच के तहत अब तक बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) से जुड़े करीब 45 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि 12 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान आधिकारिक तौर पर केस डायरी में दर्ज किए गए हैं। इन्हीं बयानों और CCTV Footage के आधार पर अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
21 जून से पहले का डिलीट डेटा होगा रिकवर
एसआईटी के कब्जे में फिलहाल दो Network Video Recorder (NVR) ड्राइव हैं। पहली ड्राइव में 21 जून की शाम से 28 जून तक की रिकॉर्डिंग मौजूद है, जबकि दूसरी ड्राइव में 28 जून के बाद की फुटेज सुरक्षित है। अब दोनों ड्राइव को Forensic Lab भेजा जाएगा। जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य 21 जून से पहले कथित रूप से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करना और यह पता लगाना है कि कहीं रिकॉर्डिंग के साथ तकनीकी छेड़छाड़ या साक्ष्य मिटाने की कोशिश तो नहीं की गई।
जांच का दायरा और बढ़ा
एसआईटी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित चढ़ावा चोरी की साजिश में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे या नहीं। अधिकारियों का मानना है कि Forensic Report मिलने के बाद कई नई कड़ियां सामने आ सकती हैं, जिससे पूरे मामले में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
बिल अनियमितता मामले में कर्मचारियों को मिलेगा जवाब देने का मौका
इसी बीच BKTC ने केदारनाथ में अतिथियों के ठहरने और भोजन के खर्च से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का निर्णय लिया है। समिति के CEO सोहन सिंह रांगड़ के अनुसार, दोनों कर्मचारियों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किए जा रहे हैं और शासन के निर्देशों के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई सियासत
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर मंदिर समिति के संसाधनों के दुरुपयोग और चढ़ावा चोरी मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, हेमंत द्विवेदी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यकाल की जांच कराई जा सकती है। उन्होंने पूर्व कार्यकाल में समिति के धन के कथित दुरुपयोग की जांच कराने की भी बात कही है।
फिलहाल Badrinath Temple Donation Theft Case में पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।