Crude oil is cheaper; why aren't petrol and diesel prices falling in India?
ईरान-इज़रायल तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में गिरावट आई है। कई देशों ने इसका फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम घटा दिए हैं। लेकिन भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इसके पीछे कई आर्थिक और नीतिगत कारण हैं।
कई देशों में सस्ता हुआ ईंधन
ब्रेंट क्रूड की कीमत युद्ध के दौरान ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद अब करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। इसके बाद पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार, चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।
भारत में कीमतें क्यों नहीं घटीं?
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल कंपनियों को इस नुकसान की भरपाई करने में अभी दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इसलिए कच्चे तेल के सस्ता होने का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना कम है।
चुनावी दौर में भी नहीं बढ़ाए गए थे दाम
चुनावी अवधि के दौरान सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से परहेज किया था। इसी दौरान केंद्र सरकार ने प्रति लीटर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी भी घटाई थी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली, लेकिन सरकार के टैक्स संग्रह पर असर पड़ा।
सरकार के राजस्व पर भी असर
एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार को सालाना करीब एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां दोनों वित्तीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और तेल कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई कर लेती हैं, तब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, कीमतों में बदलाव का फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार, सरकारी कर नीति और तेल कंपनियों की लागत जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।