Ganga Dussehra Celebration: गंगा घाटों पर उमड़ी भक्तों की भीड़, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Haridwar में Ganga Dussehra 2026 के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार सुबह भोर होते ही लाखों श्रद्धालु पवित्र Ganga River में स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। “हर-हर महादेव” और “हर-हर गंगे” के जयघोष से पूरी गंगा नगरी भक्तिमय माहौल में डूबी नजर आई।

Har Ki Pauri और घाटों पर उमड़ी भारी भीड़

हरिद्वार, Rishikesh और Devprayag समेत कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया और पूजा-अर्चना की।

Har Ki Pauri समेत प्रमुख घाटों पर साधु-संतों और श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल के साथ अर्धसैनिक जवान भी घाटों पर तैनात रहे।

प्रशासन रहा Alert Mode पर

गंगा दशहरा स्नान को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट दिखाई दिया। डीएम मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत भुल्लर अधिकारियों के साथ लगातार फील्ड में मौजूद रहे और व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष निगरानी रखी गई।

क्यों मनाया जाता है Ganga Dussehra?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। पौराणिक कथा के मुताबिक राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं, लेकिन उनके तेज वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया।

Bhagirath और Shiva से जुड़ी यह कथा सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखती है। माना जाता है कि इसके बाद गंगा की धारा पृथ्वी पर प्रवाहित हुई और लोगों को पापों से मुक्ति का मार्ग मिला।

Ganga Snan और पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक विश्वास है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति दस प्रकार के पापों से मुक्त होता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, छल, कपट और परनिंदा जैसे दोषों से मुक्ति पाने के लिए श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा करते हैं।

Skanda Purana में भी गंगा दशहरा के महत्व का उल्लेख मिलता है। इस दिन तर्पण, दान और भगवान शिव का अभिषेक करने को विशेष पुण्यदायी माना गया है।

इन चीजों के दान का माना जाता है विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा पर सत्तू, मिट्टी का मटका और हाथ का पंखा दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। देशभर के गंगा घाटों पर भक्त स्नान के बाद दान-पुण्य, भजन, उपवास और गंगा आरती में हिस्सा लेते हैं।

वाराणसी से हरिद्वार तक दिखी आस्था

Varanasi के दशाश्वमेध घाट से लेकर हरिद्वार की हर की पौड़ी तक गंगा आरती और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इसके अलावा Prayagraj, Patna और Ganga Sagar में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।