Central Bank of India में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री शुरू, शेयर 6% लुढ़के
सरकारी बैंक Central Bank of India के शेयर शुक्रवार को बाजार खुलते ही दबाव में आ गए। बैंक का स्टॉक करीब 6% टूटकर 31.89 रुपये तक पहुंच गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा Offer For Sale (OFS) के जरिए बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचना माना जा रहा है।
सरकार बैंक में अपनी हिस्सेदारी market price से करीब 8% सस्ते दाम पर बेच रही है, जिसके बाद निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई।
31 रुपये के Floor Price पर सरकार बेच रही हिस्सा
केंद्र सरकार ने Central Bank of India में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए 31 रुपये प्रति शेयर का floor price तय किया है। जबकि गुरुवार को बैंक का शेयर BSE पर 33.91 रुपये पर बंद हुआ था।
यानी सरकार मौजूदा closing price के मुकाबले 8% से ज्यादा discount पर शेयर बेच रही है। इसी वजह से शुक्रवार को बाजार खुलते ही शेयर में भारी selling pressure देखने को मिला।
OFS के जरिए बिकेगी 8% तक हिस्सेदारी
Department of Investment and Public Asset Management (DIPAM) के मुताबिक, सरकार पहले चरण में 4% equity stake बेच रही है। इसके अलावा Green Shoe Option के जरिए 4% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है।
इस तरह कुल मिलाकर सरकार Central Bank of India में 8% तक stake sale कर सकती है।
Retail और Non-Retail Investors के लिए अलग तारीख
OFS प्रक्रिया के तहत:
Non-retail investors 22 मई से बोली लगा सकेंगे
Retail investors 25 मई से आवेदन कर पाएंगे
सरकार का उद्देश्य public shareholding बढ़ाना और minimum public shareholding norms का पालन करना है।
अभी भी सरकार के पास 89% से ज्यादा हिस्सेदारी
स्टॉक एक्सचेंज डेटा के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक Central Government की Central Bank of India में 89.27% हिस्सेदारी थी।
वहीं, public shareholding सिर्फ 10.73% है। SEBI के minimum public shareholding rules के अनुसार सरकार को आने वाले समय में और हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार को बैंक में करीब 14.27% अतिरिक्त हिस्सेदारी और कम करनी होगी।
Goldman Sachs को बनाया गया था Transaction Advisor
केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में Central Bank of India समेत कई PSU Banks में stake sale प्रक्रिया के लिए Goldman Sachs को transaction advisor नियुक्त किया था।
सरकार लगातार public sector banks में अपनी हिस्सेदारी कम करने की दिशा में काम कर रही है।
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