Congress Leadership Crisis: Why is accountability not being fixed after the defeat in Assam-Bengal?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विवादित बयान को लेकर दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है। यह मामला पिछले वर्ष राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के दौरान दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भाजपा, आरएसएस और इंडियन स्टेट (भारतीय राज्य) से लड़ाई की बात कही थी।
याचिका और अदालत में चुनौती
सिमरन गुप्ता नामक याचिकाकर्ता ने संभल की अदालत में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी का बयान देश की संप्रभुता और राज्य के खिलाफ है।
प्रारंभ में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने जिला अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।
मई 2025 में जिला अदालत ने राहुल गांधी को नोटिस जारी किया और अप्रैल 2026 में पेश होने या जवाब देने का निर्देश दिया।
7 नवंबर 2025 को चंदौसी स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने याचिका को ‘कमजोर’ करार देते हुए खारिज कर दिया।
इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
राहुल गांधी का विवादित बयान
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है।
उनके शब्दों में, “अगर आप यह सोचते हैं कि हम भाजपा या आरएसएस जैसे किसी राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं, तो आप स्थिति को नहीं समझ रहे हैं। भाजपा और आरएसएस ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हमारी लड़ाई भाजपा, आरएसएस और खुद इंडियन स्टेट से है।”
उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता और संस्थानों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
हाईकोर्ट में सुनवाई
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की पीठ ने याचिकाकर्ता और विपक्षी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। याचिकाकर्ता के वकील सचिन गोयल का तर्क है कि राहुल गांधी का बयान संवैधानिक ढांचे को चुनौती देने जैसा है और इस पर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।