Will the face of the villages change? Plans afoot to build 315 roads and 32 bridges in Uttarakhand.
उत्तराखंड के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य में सड़क और पुल निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की। बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण (PMGSY-IV) के तहत ₹2,708 करोड़ की प्रस्तावित परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की दिशा में सकारात्मक सहमति बनी।
315 सड़कें और 32 पुल बनाने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, PMGSY-IV के तहत उत्तराखंड में 315 मोटर मार्गों के निर्माण के लिए ₹2,526 करोड़ के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। इन सड़कों की कुल लंबाई 1,777 किलोमीटर प्रस्तावित है। इसके अलावा, 32 पुलों के निर्माण पर ₹182 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव है। इस तरह सड़क और सेतु निर्माण की कुल अनुमानित लागत ₹2,708 करोड़ है।
बैठक के दौरान इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने के संबंध में चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्तावों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, इन परियोजनाओं पर अंतिम मंजूरी और निर्माण कार्य की शुरुआत संबंधित स्वीकृतियों तथा आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
610 बसावटों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य
प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तराखंड की 610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ना है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर सड़क सुविधा से दैनिक आवागमन आसान हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज पहुंचने, मरीजों को अस्पतालों तक ले जाने और ग्रामीणों को रोजगार के अवसरों से जुड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय राज्य में सड़कें केवल यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास का भी महत्वपूर्ण आधार हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से दूरस्थ गांवों तक जरूरी सेवाएं और सरकारी योजनाएं पहुंचाने में भी सुविधा होगी।
किसानों और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से किसानों को अपनी उपज बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत मिल सकती है। इससे स्थानीय उत्पादों की ढुलाई आसान होगी और ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार तथा छोटे कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं बनेंगी।
इसके अलावा, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाने वाले गांवों तक पहुंच बेहतर होने से ग्रामीण पर्यटन को भी लाभ मिल सकता है। पर्यटन से जुड़े स्थानीय व्यवसायों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
213 अतिरिक्त सड़क प्रस्तावों पर भी चर्चा
बैठक में उत्तराखंड के लिए 213 अतिरिक्त सड़क परियोजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इन प्रस्तावों के तहत कुल 1,360 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाने की योजना है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन प्रस्तावों पर भी जल्द स्वीकृति देने की दिशा में विचार करने का आश्वासन दिया।
यदि इन अतिरिक्त प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो प्रदेश के ग्रामीण सड़क नेटवर्क का और विस्तार हो सकता है। इससे उन क्षेत्रों को फायदा पहुंचने की संभावना है, जहां अब भी आवागमन के लिए बेहतर सड़क सुविधाओं की जरूरत है।
पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में बढ़ेंगी विकास की संभावनाएं
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई गांवों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में सड़क संपर्क का विस्तार आपातकालीन परिस्थितियों, स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सामान की आपूर्ति के लिए भी अहम माना जाता है। बेहतर सड़कें दुर्गम इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान बनाने में मदद कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के हर क्षेत्र तक पहुंचे और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कोई भी गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने सड़क और पुल निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर सहयोग के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
प्रस्तावित परियोजनाओं को मंजूरी मिलने और उनका समयबद्ध निर्माण होने पर उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्थानीय पर्यटन और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।