45 साल तक क्यों छिपाते रहे Ayatollah Khamenei अपना दाहिना हाथ? जानिए पूरी कहानी

Iran के Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei लगभग 45 वर्षों तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपना दाहिना हाथ छिपाकर रखते थे। इसके पीछे वजह थी 1981 का एक deadly assassination attempt, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। उस समय Khamenei राष्ट्रपति थे और Iran-Iraq War के दौरान एक मस्जिद में नमाज के बाद लोगों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनकी मेज पर tape recorder रख दिया, जो कुछ ही क्षणों बाद blast हो गया। इस बम धमाके में वे गंभीर रूप से घायल हुए और कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। इस हमले की जिम्मेदारी Furqan Group नामक संगठन ने ली थी।

इस विस्फोट के कारण उनका दाहिना हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें paralysis हो गया। बाद के वर्षों में वे अधिकतर public appearances में अपना right hand ढककर रखते थे और शपथ लेते समय बायां हाथ उठाते थे। उन्होंने एक बार कहा था, “अगर मेरा दिमाग और जुबान काम कर रही है तो मुझे एक हाथ की जरूरत नहीं है।” यह बयान उनकी political resilience और strong leadership image को दर्शाता है।

Khamenei’s Rise to Power

Ayatollah Ruhollah Khomeini की 1989 में मृत्यु के बाद Khamenei को Supreme Leader चुना गया। हालांकि उस समय उनके धार्मिक दर्जे को लेकर विवाद हुआ, क्योंकि वे Grand Ayatollah नहीं थे। बाद में constitutional amendment के जरिए उन्हें औपचारिक रूप से यह पद दिया गया। इसके बाद उन्होंने Velayat-e-Faqih सिद्धांत के तहत व्यापक शक्तियां संभालीं, जिसमें Supreme Leader को नीतिगत और सैन्य मामलों में सर्वोच्च अधिकार प्राप्त होते हैं।

Khamenei ने Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के साथ मजबूत संबंध बनाए और तीन दशकों से अधिक समय तक Iran की domestic politics और foreign policy पर सख्त नियंत्रण रखा। कई human rights reports के अनुसार, उनके शासनकाल में internal dissent को कड़े कदमों से दबाया गया।

Controversial Rule and Global Impact

US-Israel strikes में उनकी मौत की खबर के बाद Middle East tension चरम पर पहुंच गया है। Gulf region में protests और geopolitical instability बढ़ गई है। Khamenei का लंबा शासन Iran’s political system, Shia ideology और regional influence के लिहाज से बेहद अहम रहा।

1939 में Mashhad में जन्मे Khamenei ने Najaf और Qom में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की। कम उम्र में ही उन्होंने revolutionary Islam को अपनाया और Shah Mohammad Reza Pahlavi के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया। 1979 की Islamic Revolution के बाद वे सत्ता के केंद्र में आए और अंततः Iran के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल हुए।

Ayatollah Khamenei की कहानी एक ऐसे नेता की है जिसने bomb attack से बचकर Supreme Power तक का सफर तय किया, लेकिन उनका शासन हमेशा global debate और controversy का विषय बना रहा।