Uttarakhand Cabinet approves major decisions on government jobs, business, and flood control.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित मेला नियंत्रण सभागार में हुई उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में सेवामुक्त अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में राहत देने, बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निर्माण को नियंत्रित करने, कारोबार से जुड़े नियम आसान बनाने और बच्चों को वीरता के लिए सम्मानित करने जैसे अहम विषयों पर निर्णय लिए गए।
कैबिनेट के फैसलों में सबसे प्रमुख निर्णय सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए सरकारी वर्दीधारी पदों पर भर्ती से जुड़ा है। इसके अलावा सरकारी परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से मिलने वाली राशि, अग्निशमन व्यवस्था, पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के कर्मचारियों की सेवा अवधि और हरिद्वार में आध्यात्मिक शोध केंद्र के विकास को लेकर भी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
सेवामुक्त अग्निवीरों को सरकारी भर्ती में मिलेगी राहत
उत्तराखंड सरकार ने सेवामुक्त अग्निवीरों को राज्य की सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखण्ड क्षैतिज आरक्षण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत समूह ‘ग’ की सीधी भर्ती वाले वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों को विशेष रियायतें देने का प्रावधान है। इन पदों में पुलिस और वन विभाग से जुड़े पद शामिल हो सकते हैं।
इससे पहले वर्ष 2025 की नियमावली के तहत अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के साथ आयु सीमा और शारीरिक दक्षता से संबंधित छूट का प्रावधान बताया गया था। अब नई नियमावली में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बदलाव किए गए हैं। इसके तहत लिखित परीक्षा (Written Examination) और शारीरिक मानक परीक्षा (Physical Standards Test) में भी विशेष छूट देने की व्यवस्था की गई है।
इस निर्णय का उद्देश्य सेना में सेवा पूरी करने के बाद राज्य लौटने वाले युवाओं को सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करना है। हालांकि, अलग-अलग पदों पर लागू होने वाली छूट की विस्तृत शर्तें संबंधित भर्ती नियमों और अधिसूचनाओं से स्पष्ट होंगी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण पर नियंत्रण
उत्तराखंड में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए कैबिनेट ने उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है। राज्य में नदियों और घाटियों के आसपास स्थित क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम देखते हुए जमीन के उपयोग और निर्माण गतिविधियों को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।
नई नियमावली के माध्यम से वर्ष 2012 के संबंधित अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्पष्ट नियम और मानक निर्धारित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य नदियों के प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखना और बाढ़ की स्थिति में लोगों, मकानों तथा सरकारी संपत्तियों को होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करना है।
कारोबार करना होगा आसान, छोटे उल्लंघनों पर बदलेगा नियम
राज्य में Ease of Doing Business को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने द्वितीय उत्तराखण्ड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी है।
इस प्रस्ताव के तहत छोटे व्यापारिक और तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने तथा
मामूली प्रक्रियात्मक गलतियों पर प्रशासनिक कार्रवाई या नागरिक दंड की व्यवस्था करने का प्रावधान है। साथ ही, समय के साथ अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियमों को हटाने की दिशा में भी कदम उठाया जाएगा।
इसका उद्देश्य व्यापारियों और उद्यमियों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं से राहत देना और राज्य में कारोबार के अनुकूल माहौल तैयार करना है। विधेयक के प्रावधान लागू होने की स्थिति विधानसभा की प्रक्रिया और अंतिम कानून पर निर्भर करेगी।
परिसंपत्तियों से होने वाली कमाई का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित संस्थाओं को
कैबिनेट ने उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम, 2023 की अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के स्थानीय निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण (Asset Monetization) से प्राप्त राशि का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित संस्था को वापस देने का प्रावधान किया गया है।
इस फैसले से संबंधित संस्थाओं को विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
साहसी बच्चों को मिलेगा मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार
विपरीत परिस्थितियों में साहस दिखाने और दूसरों की मदद के लिए आगे आने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना शुरू करने का निर्णय लिया है।
इस योजना के तहत ऐसे बच्चों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में साहस, पराक्रम, मानवीय संवेदना और दूसरों की रक्षा के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हों। योजना का उद्देश्य बच्चों का मनोबल बढ़ाना और समाज में साहस तथा सेवा की भावना को प्रोत्साहित करना है।
विधानसभा के तीसरे सत्र की तारीख और स्थान मुख्यमंत्री तय करेंगे
कैबिनेट ने उत्तराखण्ड की पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तीसरे सत्र को बुलाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। सत्र कब आयोजित होगा और इसके लिए देहरादून या गैरसैंण में से किस स्थान का चयन किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लेंगे।
ऋषिकुल में विकसित होगा प्राच्य शोध संस्थान
हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास के लिए एक समर्पित सोसायटी के गठन को मंजूरी दी गई है। योजना के तहत संस्थान को शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
यहां योग एवं ध्यान केंद्र, आयुर्वेद अध्ययन और अनुसंधान केंद्र, ज्योतिष एवं प्राच्य अध्ययन केंद्र, ललित कला केंद्र, हिंदू अध्ययन एवं दर्शन केंद्र तथा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे प्राचीन भारतीय ज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध गतिविधियों को एक मंच पर लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्वजल और जल एवं स्वच्छता मिशन के 215 पदों की अवधि बढ़ी
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता संबंधी सेवाओं को जारी रखने के लिए कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत स्वजल परियोजना के 189 पदों और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 26 पदों की सेवा अवधि बढ़ाने को मंजूरी दी है। कुल 215 पदों की अवधि 1 मार्च 2026 से बढ़ाकर 28 फरवरी 2027 तक की गई है। इन कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का भुगतान पहले की तरह जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के रास्ते में मिली राहत
हरिद्वार जिले की भगवानपुर तहसील के ग्राम सिसौना में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रस्तावित किफायती आवासीय परियोजना के पहुंच मार्ग की चौड़ाई में छूट देने का निर्णय लिया गया है।
नियमों के तहत सड़क की चौड़ाई नौ मीटर होनी थी, लेकिन मौके पर छह मीटर चौड़ा मार्ग उपलब्ध है। ऐसे में कैबिनेट ने तीन मीटर की विशेष शिथिलता को मंजूरी दी, ताकि परियोजना के निर्माण में रास्ते की चौड़ाई बाधा न बने।
ऊधमसिंह नगर में भूमि रिकॉर्ड की गलती सुधरेगी
कैबिनेट ने ऊधमसिंह नगर जिले की बाजपुर तहसील के ग्राम भौना इस्लामनगर में भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़े पुराने शासनादेश में संशोधन को मंजूरी दी है। मामला 24,280 वर्गमीटर भूमि के औद्योगिक से आवासीय उपयोग में परिवर्तन से संबंधित है।
10 नवंबर 2023 के शासनादेश में खसरा संख्या दर्ज करने में हुई लिपिकीय त्रुटि को सुधारते हुए खसरा संख्या 321/1अ के स्थान पर 321/2अ दर्ज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
अग्निशमन और आपात सेवाओं के लिए नया विधेयक
प्रदेश में आग लगने की घटनाओं और अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उत्तराखण्ड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी गई है।
यह विधेयक केंद्र सरकार के Model Fire Service Bill, 2019 की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरों, नए उद्योगों और आपदा प्रबंधन की जरूरतों के अनुरूप अग्निशमन व्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाना है।
संस्कृति विभाग के प्रशासनिक नियमों में संशोधन
कैबिनेट ने उत्तराखण्ड वित्तीय हस्त पुस्तिका के संबंधित नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में दर्ज ‘निदेशक, कला एवं संस्कृति विभाग’ के स्थान पर ‘महानिदेशक, संस्कृति निदेशालय, उत्तराखण्ड’ का नाम शामिल किया जाएगा।
इस बदलाव से विभाग के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के संचालन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार के सहयोग के लिए जताया आभार
बैठक के दौरान कैबिनेट ने राज्य के विकास कार्यों में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। सरकार ने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों, सीमावर्ती क्षेत्रों और सामरिक महत्व को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण है।
कैबिनेट के इन निर्णयों का असर सरकारी भर्ती, ग्रामीण विकास, कारोबार, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इनमें से जिन प्रस्तावों को विधेयक या विस्तृत नियमों के जरिए लागू किया जाना है, उनका अंतिम स्वरूप संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।