UP Police Action: 40,000 rupees recovered from businessman, 5 suspended including Surveillance Cell in-charge
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में पुलिस पर अवैध वसूली (Illegal Recovery) का गंभीर आरोप सामने आया है। मेडिकल स्टोर संचालक से 40 हजार रुपये लेने के मामले में Surveillance Cell प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
इस कार्रवाई को लेकर जिले में Law & Order और Police Accountability पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
फर्जी ‘उड़न दस्ता’ बनकर की गई थी रेड
कोतवाली थाना क्षेत्र के फीलखाना रेती स्ट्रीट निवासी अधिवक्ता मोहम्मद जमशेद कुरैशी ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार 8 जनवरी की रात कुछ लोग मेडिकल स्टोर पर पहुंचे और खुद को ड्रग विभाग का ‘उड़न दस्ता’ (Flying Squad) बताया।
आरोप है कि चेकिंग के नाम पर स्टोर में घुसते ही CCTV कैमरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई ताकि किसी तरह का डिजिटल सबूत न बचे। इसके बाद संचालक उवैद कुरैशी को जबरन निजी वाहन में बैठाकर ले जाया गया और छोड़ने के बदले मोटी रकम की मांग की गई।
डरे हुए परिजनों से कथित तौर पर 40,000 रुपये लेकर ही संचालक को छोड़ा गया।
CCTV फुटेज ने खोली सच्चाई
शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सतपाल अंतिल ने क्षेत्राधिकारी (CO) से गोपनीय जांच कराई। जांच के दौरान अहम CCTV फुटेज सामने आई, जिसमें Surveillance Team के सदस्य संचालक को हिरासत में ले जाते दिखे।
सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि इस पूरी कार्रवाई की जानकारी न तो उच्चाधिकारियों को दी गई थी और न ही संबंधित ड्रग विभाग को। बिना किसी कानूनी वारंट या आधिकारिक अनुमति के की गई इस कथित रेड को नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया।
SSP का सख्त संदेश: Zero Tolerance on Corruption
जांच रिपोर्ट के आधार पर SSP ने Surveillance Cell प्रभारी एसआई वीर बोस, मुख्य आरक्षी मनोज यादव और आरक्षी शिवम चिकारा, विपिन शर्मा व यश दहिया को निलंबित कर दिया।
SSP ने स्पष्ट किया कि Police Misconduct, Corruption और Public Harassment के मामलों में Zero Tolerance Policy अपनाई जाएगी। विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू कर दी गई है।
UP Police पर लगातार उठ रहे सवाल
इससे पहले मेरठ में भी कारोबारियों से बड़ी रकम वसूलने का मामला सुर्खियों में रहा था। ऐसे मामलों ने Business Community और आम जनता के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से Police Reform और Transparency को बढ़ावा मिलेगा।