TMC Crisis: MP leaves party and moves closer to NDA; new challenge for Mamata Banerjee.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी की चुनावी हार के बाद शुरू हुई नाराजगी अब बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेती दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, TMC के 19 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाने का फैसला किया है और जल्द ही एक और बड़े नेता के इस समूह में शामिल होने की चर्चा है।
19 सांसदों ने स्पीकर को भेजा पत्र
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को भेजा गया है। पत्र में इन सांसदों ने पार्टी से अलग रुख अपनाने और सत्तारूढ़ NDA के साथ खड़े होने की इच्छा जताई है।
बताया जा रहा है कि इस समूह में Kakoli Ghosh Dastidar, Satabdi Roy, Saayoni Ghosh और Yusuf Pathan जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इनमें से कई नेता पहले ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे।
तीन सांसद पहले ही दे चुके हैं इस्तीफा
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कई नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा भी दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, Prakash Baraik, Sushmita Dev और Sukhendu Ray पहले ही अपने पद छोड़ चुके हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने भी विद्रोही समूह के पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं या नहीं।
दलबदल कानून से बचने की रणनीति?
सूत्रों के अनुसार, विद्रोही गुट का दावा है कि उसे 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। ऐसे में यदि 19 या उससे अधिक सांसद एक साथ अलग होते हैं तो दलबदल कानून (Anti-Defection Law) से जुड़े समीकरण बदल सकते हैं।
कीर्ति आजाद ने BJP पर लगाए आरोप
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए TMC सांसद Kirti Azad ने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं को राजनीतिक दबाव और प्रलोभन देकर विद्रोही गुट में शामिल किया गया।
उन्होंने BJP के कथित “Operation Lotus” पर भी निशाना साधा और कहा कि पार्टी को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
चुनावी हार के बाद बढ़ा असंतोष
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। विद्रोही नेताओं का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व जमीनी हकीकत से दूर हो गया है और संगठन में भ्रष्टाचार तथा कुछ चुनिंदा नेताओं का प्रभाव बढ़ गया है।
कई नेताओं ने विशेष रूप से Abhishek Banerjee की भूमिका और बढ़ते प्रभाव पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया अत्यधिक केंद्रीकृत हो गई है।
कलीयन बनर्जी के बयान से और बढ़ा विवाद
इस बीच वरिष्ठ TMC नेता Kalyan Banerjee ने भी अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनकी कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर मौजूदा संकट और असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विद्रोही गुट का दावा सही साबित होता है और एक-दो बड़े नेता और इस खेमे में शामिल हो जाते हैं, तो TMC नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में सभी की नजर Mamata Banerjee की अगली रणनीति और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को संभालने के प्रयासों पर टिकी हुई है।