Supreme Court on Caste Census: “जाति मुक्त समाज बनाना था, हम उल्टा कर रहे हैं”

देश में Caste Census और DNT (Denotified, Nomadic and Semi-Nomadic Tribes) की अलग गणना को लेकर दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने इस मुद्दे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को caste-free society की दिशा में बढ़ना चाहिए, लेकिन लगातार नए वर्ग बनाकर समाज को बांटने की कोशिश हो रही है।

Court Observation: “Society को बांटने की साजिश”

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की मांगें समाज में और अधिक classification और division को बढ़ावा देती हैं।

पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे मुद्दे अचानक सामने नहीं आते, बल्कि इनके पीछे गहरी रणनीति हो सकती है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की मांगों की origin और intent की जांच की जरूरत हो सकती है।

Policy Matter बताकर Court ने किया हस्तक्षेप से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Census classification पूरी तरह से सरकार और संबंधित एजेंसियों का विषय है।

अदालत ने कहा कि:

यह एक policy decision है
न्यायपालिका इस पर आदेश नहीं दे सकती
याचिकाकर्ता अपनी मांग सरकार के सामने रख सकते हैं

इस फैसले के बाद अब Government of India पर निर्भर करेगा कि वह Census 2027 में इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है।

Petitioners की क्या थी मांग?

याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि:

DNT communities के लिए Census में अलग category दी जाए
उनकी population का सही data सामने आए
Welfare schemes और reservation policies का लाभ सही तरीके से मिल सके
Historical Context: 1913 के बाद नहीं हुई अलग गिनती

याचिका में बताया गया कि:

इन समुदायों की आखिरी बार गणना 1913 में हुई थी
आजादी के बाद इन्हें अलग से census में शामिल नहीं किया गया
अनुमान के अनुसार इनकी आबादी 10-12 करोड़ के बीच है
Committees ने भी की थी सिफारिश

कई आयोगों और समितियों ने इन समुदायों की अलग पहचान की जरूरत बताई थी, जैसे:

Renke Commission (2008)
Idate Commission (2017)

इन रिपोर्ट्स में कहा गया था कि DNT groups को सही पहचान न मिलने से वे policy benefits से वंचित रह जाते हैं।

Criminal Tribes Act का असर आज भी

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि:

अंग्रेजों के समय लागू Criminal Tribes Act, 1871 ने इन समुदायों को “अपराधी” घोषित कर दिया था
कानून हटने के बावजूद social stigma आज भी बना हुआ है
सही डेटा न होने से इनकी स्थिति सुधारने में दिक्कत आ रही है
Supreme Court Final Verdict

कोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में कहा कि:

Census में किसी भी तरह का classification या sub-classification सरकार का अधिकार है
यह मामला judicial review के दायरे में नहीं आता
इसलिए याचिका को खारिज किया जाता है
Conclusion: अब नजर सरकार के फैसले पर

Supreme Court के इस फैसले के बाद अब पूरा मामला सरकार के पाले में है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Census 2027 में सरकार DNT communities को लेकर क्या रुख अपनाती है।

यह मुद्दा केवल data collection तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े हैं social justice, inclusion और policy planning जैसे बड़े सवाल।