Islamabad Talks से पहले हलचल: क्या Middle East में होने वाला है बड़ा बदलाव?

अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता (Peace Talks) से पहले पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां कूटनीतिक प्रयास (diplomatic efforts) तेज किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका अपनी सैन्य ताकत (military build-up) को भी तेजी से बढ़ा रहा है।

Islamabad Talks से पहले बढ़ी हलचल

इस्लामाबाद (Islamabad) में होने वाली इस अहम बैठक से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) पाकिस्तान दौरे पर जा रहे हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्रीय स्थिति बेहद संवेदनशील (sensitive situation) बनी हुई है और किसी भी छोटी घटना से बड़ा संघर्ष (major conflict) भड़क सकता है।

Middle East में US Military Deployment तेज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पहले ही अपने फाइटर जेट्स (fighter jets) और अटैक एयरक्राफ्ट (attack aircraft) को क्षेत्र में तैनात कर दिया है। इसके साथ ही 82nd Airborne Division के करीब 1,500 से 2,000 सैनिकों को भी जल्द भेजा जा सकता है।

समुद्री क्षेत्र (naval front) में भी हलचल तेज है। USS George H.W. Bush Carrier Strike Group अटलांटिक पार कर रहा है, जबकि USS Boxer Amphibious Ready Group और 11th Marine Expeditionary Unit प्रशांत क्षेत्र से खाड़ी (Gulf region) की ओर बढ़ रहे हैं।

कितनी बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी?

इन नई तैनातियों के बाद Middle East में अमेरिकी सैनिकों (US troops) की संख्या 50,000 से अधिक हो गई है, जो सामान्य तौर पर लगभग 40,000 रहती है। इसके अलावा हजारों मरीन (marines) और नौसैनिक (navy personnel) पहले से ही मौजूद हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बलों का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर जमीनी अभियान (ground operations) में भी किया जा सकता है। संभावित टारगेट्स (strategic targets) में ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) भी शामिल हो सकता है।

Iran की शर्तें और Warning

दूसरी ओर, ईरान ने भी वार्ता के लिए अपनी तैयारी दिखा दी है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) और विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है।

हालांकि, तेहरान (Tehran) ने साफ कहा है कि औपचारिक बातचीत से पहले लेबनान (Lebanon) में ceasefire लागू होना चाहिए। ईरान ने अमेरिका पर अविश्वास (lack of trust) जताते हुए चेतावनी दी है कि अगर यह वार्ता केवल दिखावा साबित हुई, तो जवाबी कार्रवाई (counter action) की जाएगी।

Donald Trump का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कूटनीति असफल (diplomacy fails) होती है, तो सैन्य कार्रवाई (military action) का विकल्प पूरी तरह खुला है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी warships तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

Dual Strategy: बातचीत भी, दबाव भी

पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अमेरिका एक dual strategy अपना रहा है—एक तरफ peace talks के जरिए समाधान की कोशिश, और दूसरी ओर military pressure बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करना।

Hormuz Strait बना Global Concern

इस तनाव के बीच होरमुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है। दुनिया की लगभग 20% oil supply इसी रास्ते से गुजरती है। मौजूदा संकट का असर global economy और fuel prices पर भी साफ देखा जा रहा है।

हालांकि, military experts का मानना है कि 50,000 सैनिक किसी बड़े युद्ध (full-scale war) के लिए पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि ईरान का विशाल भूभाग (geography) और बड़ी आबादी किसी भी सैन्य अभियान को जटिल बना सकती है।

अब पूरी दुनिया की नजर Islamabad Peace Talks पर टिकी हुई है। यह तय करेगा कि Middle East कूटनीतिक समाधान (diplomatic solution) की ओर बढ़ेगा या एक बड़े संघर्ष (major escalation) की तरफ।