Pentagon Secret Report Leak: Major threat to US Missile Stockpile?
मिडिल ईस्ट में जारी US-Iran Conflict चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने Global Security और Defense Strategy को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon से लीक हुई जानकारी ने हथियारों की कमी (Missile Stockpile Crisis) को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिका अगले 10 दिनों तक ईरान पर हमले जारी रखता है, तो उसके पास मौजूद कई महत्वपूर्ण Precision Weapons और Interceptors तेजी से घट सकते हैं।
Trump का Military Operation और Iran का Counter Attack
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ परमाणु वार्ता पर असंतोष जताने के कुछ घंटों बाद एक बड़े Military Operation को मंजूरी दी। इस ऑपरेशन में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei समेत कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत की खबर सामने आई।
इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले (Missile & Drone Strikes) किए। इससे Middle East Tension और अधिक बढ़ गई है।
Pentagon की चेतावनी बनाम Trump का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Pentagon ने व्हाइट हाउस को आगाह किया है कि लंबा युद्ध अमेरिका के Ammunition Reserve पर भारी दबाव डाल सकता है।
‘The Wall Street Journal’ की रिपोर्ट में बताया गया कि Joint Chiefs of Staff के अधिकारियों ने पहले ही चेताया था कि इजरायल और यूक्रेन को Military Aid देने से अमेरिकी हथियारों का रिजर्व कम हो चुका है।
हालांकि, इन चेतावनियों के विपरीत राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिका के पास “लगभग असीमित” हथियार भंडार है और वह युद्ध “हमेशा” लड़ सकता है।
कौन से Weapons हो रहे हैं कम?
Defense Analysts के अनुसार, अमेरिका के Advanced Precision Munitions और Missile Defense Interceptors सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं:
THAAD Interceptors: पिछले संघर्ष में 25% स्टॉक इस्तेमाल हो चुका है।
JDAMs (Joint Direct Attack Munitions): GPS-Guided Smart Bomb Kits की उपलब्धता पर असर।
SM-3 (Standard Missile-3): Ship-Launched Interceptors की संख्या घट रही है।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने खुलासा किया कि ईरान हर महीने लगभग 100 मिसाइलें बना रहा है, जबकि अमेरिका केवल 6-7 Interceptors प्रति माह तैयार कर पा रहा है। यह Missile Production Gap रणनीतिक चुनौती बन सकता है।
Economic Cost of War: 24 घंटे में 6900 करोड़ रुपये खर्च
यह युद्ध अमेरिका पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है।
Daily Military Spending
हमलों के पहले 24 घंटों में अमेरिका ने लगभग 779 मिलियन डॉलर (करीब 6,900 करोड़ रुपये) खर्च कर दिए।
Carrier Strike Group Cost
दुनिया के सबसे बड़े Aircraft Carrier में से एक USS Gerald R. Ford को ऑपरेट करने की लागत करीब 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन है।
Pre-Deployment Military Expense
हमले से पहले की तैयारियों—जैसे Aircraft Deployment और Naval Mobilization—पर लगभग 630 मिलियन डॉलर खर्च हुए।
Long War Projection
पेन व्हार्टन बजट मॉडल के निदेशक केंट स्मेटर्स के अनुसार, यदि युद्ध 4-5 सप्ताह से आगे बढ़ता है, तो कुल खर्च 210 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
Previous Military Aid और Middle East Operations
ब्राउन यूनिवर्सिटी की 2025 ‘Costs of War’ रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से अमेरिका इजरायल को 21.7 बिलियन डॉलर की सैन्य सहायता दे चुका है।
यमन, ईरान और Middle East Operations को मिलाकर कुल खर्च 31 से 33 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच चुका है। यह आंकड़ा US Defense Budget और Fiscal Pressure पर गंभीर असर डाल सकता है।
Missile Race: क्या Iran रणनीतिक बढ़त ले रहा है?
Military Experts का मानना है कि अमेरिकी Missile Defense System मुख्य रूप से रूस और चीन जैसी बड़ी ताकतों के सीमित हमलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन ईरान के लगातार और कम लागत वाले Rocket Barrage और Drone Swarm Strategy के सामने यह सिस्टम दबाव में आ सकता है।
Missile Production Speed और Low-Cost Warfare Strategy के चलते Iran Tactical Edge हासिल कर सकता है, जबकि अमेरिका को High-Tech Weapons के Replenishment में समय और भारी लागत दोनों झेलनी पड़ रही है।
Conclusion: Strategic Pressure और Global Impact
US-Iran War केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि Economic Sustainability, Defense Manufacturing Capacity और Global Power Balance की भी परीक्षा बन चुका है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या अमेरिका अपनी Military Superpower की स्थिति बनाए रख पाता है या Missile Race में Iran उसे रणनीतिक चुनौती देता रहेगा।