हरिद्वार में स्थापित हुआ 5211 किलो का विशाल पारद शिवलिंग, बना World Record

हरिद्वार में स्थित श्री साईं शिव गंगा धाम एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। बहादराबाद टोल प्लाजा के निकट बने इस आध्यात्मिक धाम में 5211 किलोग्राम वजनी विशाल पारद शिवलिंग (Parad Shivling) की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। आयोजकों का दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा Mercury Shivling है, जिसे Limca Book of Records और Asian Book of Records में भी दर्ज किया गया है।

वैदिक मंत्रोच्चार और संतों की उपस्थिति में आयोजित इस धार्मिक समारोह में देशभर से साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर भव्य संत समागम का भी आयोजन किया गया।

पांच वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ विशाल Parad Shivling

धाम प्रबंधन के अनुसार इस अनूठे शिवलिंग के निर्माण का कार्य वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। दक्षिण भारत के विशेषज्ञ ब्राह्मणों और कारीगरों ने विशेष तकनीक के माध्यम से पारे (Mercury) को स्थिर रूप देकर इस विशाल शिवलिंग का निर्माण किया। पारा अत्यधिक घनत्व वाली धातु है, जिसके कारण शिवलिंग का वजन 5211 किलो तक पहुंच गया।

यह शिवलिंग श्री साईं शिव गंगा धाम में स्थापित किया गया है और अब इसे पारदेश्वर महादेव के नाम से जाना जा रहा है।

करोड़ों की लागत, लेकिन नहीं बताई गई सटीक राशि

धाम के मैनेजिंग ट्रस्टी और उद्योगपति राजीव बंसल ने बताया कि पारा एक अत्यंत महंगी धातु है और इस शिवलिंग के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि ट्रस्ट की ओर से कुल लागत का खुलासा नहीं किया गया। उनका कहना है कि भगवान शिव की महिमा धन से कहीं अधिक मूल्यवान है।

सनातन संस्कृति और विश्व शांति का संदेश

मुख्य ट्रस्टी राजीव बंसल ने कहा कि शास्त्रों में पारद शिवलिंग को अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। विश्व के सबसे बड़े पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानव कल्याण, विश्व शांति और Sanatan Dharma के संरक्षण के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख Spiritual Destination के रूप में पहचान बनाएगा।

संतों ने बताया आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कई प्रमुख संतों ने भाग लिया। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि पारे को स्थिर कर शिवलिंग का रूप देना प्राचीन भारतीय रसविद्या का अद्भुत उदाहरण है।

वहीं, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि भगवान शिव संपूर्ण मानवता के कल्याण के प्रतीक हैं और यह स्थापना आध्यात्मिक जागरण का महत्वपूर्ण कदम है।

जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि Parad Shivling Worship से शीघ्र शुभ फल प्राप्त होते हैं और यह रोग, शोक तथा नकारात्मकता को दूर करने वाला माना जाता है।

Guinness World Records में दर्ज कराने की तैयारी

धाम प्रबंधन के अनुसार इस विशाल पारद शिवलिंग को Limca Book of Records और Asian Book of Records से प्रमाणपत्र मिल चुका है। अब इसे Guinness World Records में दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालु करेंगे दर्शन

संतों का मानना है कि आगामी Kanwar Yatra 2026 के दौरान हरिद्वार पहुंचने वाले लाखों शिवभक्त इस भव्य पारदेश्वर महादेव के दर्शन करेंगे। इससे हरिद्वार की धार्मिक और पर्यटन पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।