सारा अली खान केदारनाथ गईं तो फतवे पर भड़के हरीश रावत, बोले- आस्था रखने से क्यों रोक रहे हैं?

बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ धाम जाने और वहां पूजा-अर्चना करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिनेत्री के खिलाफ फतवा जारी किए जाने की खबरों के बीच उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सारा अली खान का समर्थन करते हुए कहा कि किसी को अपनी आस्था व्यक्त करने से रोकना उचित नहीं है। रावत ने धार्मिक कट्टरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे समाज और देश को नुकसान पहुंचता है।

सारा अली खान के समर्थन में क्या बोले हरीश रावत?

हरीश रावत ने कहा कि सारा अली खान श्रद्धापूर्वक केदारनाथ धाम पहुंचती हैं और पहले भी वहां दर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने अभिनेत्री के पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि सारा अली खान नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर की पोती तथा सैफ अली खान की बेटी हैं। रावत के मुताबिक, उनकी अपनी धार्मिक आस्था है और वह अपने धर्म का पालन भी करती हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सारा की केदारनाथ यात्रा पर आपत्ति जताने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की कट्टरपंथी सोच पर समाज को विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल पर जाकर आस्था व्यक्त करना चाहता है, तो उसे ऐसा करने से क्यों रोका जाना चाहिए?

‘धर्मपरायण होना अलग, कट्टर होना अलग’

हरीश रावत ने अपने बयान में धर्म और कट्टरता के बीच अंतर करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का धर्मपरायण होना और कट्टर होना दो अलग-अलग बातें हैं। व्यक्ति अपने धर्म का पालन करते हुए भी उदार दृष्टिकोण अपना सकता है और अपने धार्मिक मूल्यों का सम्मान कर सकता है।

रावत ने कहा कि वह इस्लाम में मूर्ति पूजा की मान्यता को लेकर धार्मिक दृष्टिकोण से परिचित हैं, लेकिन उनके अनुसार किसी धार्मिक स्थल पर जाना और वहां की आस्था के प्रति सम्मान रखना अलग विषय हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में अलग-अलग धर्मों के लोग ईश्वर को अपने-अपने तरीके से याद करते हैं और धार्मिक आस्था के मामले में दूसरों के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए।

कट्टरपंथ पर दोनों पक्षों को लेकर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक कट्टरता किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो चर्चा में आने के लिए विवादित बयान देते हैं और समाज में तनाव पैदा करते हैं।

रावत ने कहा कि ऐसे लोग न तो अपने धर्म के सच्चे हितैषी हैं और न ही समाज के। उन्होंने धार्मिक मामलों में संयम, आपसी सम्मान और उदारता बनाए रखने की जरूरत बताई। उनके बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि किसी भी व्यक्ति की आस्था को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए।

किसने जारी किया सारा अली खान के खिलाफ फतवा?

खबरों के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सारा अली खान के केदारनाथ धाम जाने और वहां पूजा-अर्चना करने को लेकर फतवा जारी किया है। मौलाना का कहना है कि इस्लाम और शरीयत के अनुसार किसी मुस्लिम व्यक्ति का मंदिर जाकर पूजा करना अनुचित है।

इस मामले में धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत आस्था को लेकर बहस शुरू हो गई है। वहीं, हरीश रावत ने सारा अली खान के समर्थन में अपनी बात रखते हुए धार्मिक सहिष्णुता और दूसरे की आस्था का सम्मान करने पर जोर दिया है।

पहले भी केदारनाथ जा चुकी हैं सारा अली खान

सारा अली खान इससे पहले भी कई बार केदारनाथ धाम जा चुकी हैं। उनकी पहली फिल्म का नाम भी ‘केदारनाथ’ था। अभिनेत्री अक्सर धार्मिक स्थलों की यात्राओं और दर्शन से जुड़ी तस्वीरों के कारण चर्चा में रहती हैं।

इस बार केदारनाथ यात्रा को लेकर फतवे की खबर सामने आने के बाद मामला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ी बहस का विषय बन गया है। हरीश रावत के बयान ने इस विवाद को राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।