बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद में पहली बड़ी कार्रवाई, कौन हैं प्रमोद नौटियाल जिन पर गिरी पहली गाज?

Badrinath Donation Controversy में पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में मंदिर के Donation Management से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। राज्य सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसे तय समय के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामला अब राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है और विपक्ष लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

कौन हैं प्रमोद नौटियाल?

प्रमोद नौटियाल लंबे समय से BKTC से जुड़े रहे हैं। वे अध्यक्ष कार्यालय में कार्यरत थे और इससे पहले भी मंदिर समिति के विभिन्न अध्यक्षों के साथ जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्त होने के बाद उन्हें बाद में व्यक्तिगत सहायक (Personal Assistant) की जिम्मेदारी दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें चढ़ावे की गणना और उससे जुड़े कार्यों में भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शुरुआती जांच में उनकी भूमिका पर सवाल उठने के बाद पहले Show Cause Notice जारी किया गया और अब उन्हें निलंबित कर दिया गया है।

जांच के बाद बढ़ा सियासी विवाद

मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी इस मामले में SIT Investigation कराने की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

15 दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट

राज्य सरकार की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति को कथित वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। समिति Donation System, Financial Records, CCTV Footage और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी। साथ ही भविष्य में दान-चढ़ावे के प्रबंधन को अधिक Transparent, Accountable और Efficient बनाने के लिए भी सुझाव देगी।

विपक्ष ने उठाए कई सवाल

विपक्ष का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले Cash Donation, Gold-Silver Donation और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए। साथ ही कपाट खुलने के दिन से अब तक की CCTV Footage सार्वजनिक करने और पूरी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक निगरानी में कराने की मांग भी उठाई जा रही है। दूसरी ओर, मंदिर समिति का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।