बिहार की राजनीति में हलचल: नीतीश कुमार का एनडीए प्रेम या मजबूरी?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपने एनडीए गठबंधन में बने रहने की बात दोहराई है। पटना के बापू सभागार में आयोजित सहकारिता कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अब एनडीए से महागठबंधन में जाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के कुछ लोगों की वजह से पिछली बार महागठबंधन का रास्ता चुना था, लेकिन अब यह गलती नहीं दोहराई जाएगी।
सीएम नीतीश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि उन्हीं के भरोसे की वजह से वे मुख्यमंत्री बने थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। नीतीश कुमार ने बिहार में महिलाओं को 50% आरक्षण और जीविका दीदी योजना जैसी पहल का उल्लेख किया, जिसने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया है।
क्या बीजेपी को नीतीश पर भरोसा?
नीतीश कुमार की बार-बार सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ रही है? राजनीतिक विशेषज्ञ इसे नीतीश कुमार की स्थिति को लेकर बीजेपी के भीतर उठ रहे सवालों का परिणाम मानते हैं। वक्फ संशोधन बिल के मुद्दे पर मुस्लिम संगठनों की नाराजगी ने जेडीयू और बीजेपी के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नीतीश कुमार एनडीए में बने रहेंगे या चुनावी समीकरण बदलेंगे?