नेपाल के पूर्व राजा का बड़ा बवाल? पासपोर्ट जब्त होने के बाद मचा हड़कंप!

क्या नेपाल में फिर से लौटेगी राजशाही?

नेपाल में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजशाही समर्थकों के विद्रोह के बाद तनाव इतना बढ़ गया कि सेना को बुलाना पड़ा। सरकार को शक है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का हाथ है।

राजशाही समर्थकों का हिंसक प्रदर्शन

पिछले कुछ दिनों से नेपाल की राजधानी काठमांडू सहित अन्य हिस्सों में राजशाही समर्थकों का विरोध प्रदर्शन जारी है। शनिवार को हालात और बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक पार्टियों के दफ्तरों पर हमला कर दिया। इस हिंसा में दो लोगों की मौत की खबर है।
काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया है और सेना को सड़कों पर उतार दिया गया है। राजशाही समर्थक संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दे दिया है। उनकी मांग है कि नेपाल में राजशाही की वापसी हो और देश को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए।

क्या पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह हैं जिम्मेदार?

नेपाल सरकार का मानना है कि इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का हाथ है। सरकार ने हिंसा फैलाने के आरोप में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की योजना बनाई है। साथ ही, पूर्व राजा का पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

ज्ञानेंद्र शाह पर लगा भारी जुर्माना

काठमांडू के नागरिक निकाय ने पूर्व राजा पर हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 7,93,000 नेपाली रुपये का जुर्माना लगाया है। अधिकारियों का दावा है कि ये प्रदर्शन ज्ञानेंद्र शाह के उकसावे पर हो रहे हैं।

लोकतंत्र दिवस के बाद से बढ़ी गतिविधियां

फरवरी में नेपाल में लोकतंत्र दिवस के बाद से राजशाही समर्थकों की गतिविधियां तेज हो गई थीं। इस दौरान पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने एक बयान जारी कर कहा था कि “देश की रक्षा का समय आ गया है और एकता लाने की जिम्मेदारी हमें उठानी चाहिए।”
इसके बाद काठमांडू और अन्य शहरों में राजशाही की वापसी और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर कई रैलियां आयोजित की गईं।

क्या फिर से लौटेगा नेपाल का राजतंत्र?

नेपाल में 2008 में 240 साल पुराने राजतंत्र को समाप्त कर लोकतांत्रिक प्रणाली अपनाई गई थी। लेकिन हालिया घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नेपाल में राजशाही की वापसी संभव है?