उत्तराखंड में मंत्रियों के घरों पर लगेंगे स्मार्ट मीटर, सीएम धामी ने दिए निर्देश

उत्तराखंड में बिजली के स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विरोध और शंकाओं के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अहम कदम उठाया है। उन्होंने राज्य के सभी मंत्रियों के सरकारी और निजी आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव ऊर्जा मीनाक्षी सुंदरम को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने को कहा है। साथ ही, ऊर्जा सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने इस फैसले को केंद्र स्तर पर लिया गया निर्णय बताया और इस प्रक्रिया के लाभों के बारे में बताया।

स्मार्ट मीटर के फायदे: उपभोक्ताओं को मिलेगी अधिक सुविधा

उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर लगाने से उपभोक्ताओं को कई फायदे होंगे। मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि इन मीटरों को मोबाइल से कनेक्ट किया जा सकेगा, जिससे उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। स्मार्ट मीटरों की मदद से बिजली की खपत पर नजर रखी जा सकेगी और उपभोक्ता अपनी खपत के अनुसार खर्च को नियंत्रित कर सकेंगे। इसके अलावा, इन मीटरों को लेकर अक्सर मिलने वाली गलत रीडिंग की शिकायतें भी खत्म हो जाएंगी।

पोस्टपेड और प्रीपेड मीटर के बीच का अंतर

हालांकि, फिलहाल राज्य में पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन यदि कोई उपभोक्ता प्रीपेड मीटर लगवाता है, तो उसे बिजली बिल में चार फीसदी की छूट मिलेगी। यह कदम उपभोक्ताओं को बिजली की खपत पर अधिक नियंत्रण देने के उद्देश्य से लिया गया है। स्मार्ट मीटर की मदद से लोग बिजली बचाने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे राज्य में बिजली की खपत में कमी आ सकती है।

सीएम के हस्तक्षेप के बाद मंत्रियों के घरों पर होंगे स्मार्ट मीटर

मंत्रियों के घरों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के फैसले का उद्देश्य जनता को यह संदेश देना है कि ये मीटर केवल आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि नेताओं के लिए भी लागू होंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि जब मंत्री और उच्च अधिकारी खुद इस प्रणाली का पालन करेंगे, तो जनता को भी इस प्रणाली में विश्वास होगा। सीएम धामी ने यह भी सुनिश्चित किया कि सचिव मीनाक्षी सुंदरम खुद अपने घर पर स्मार्ट मीटर लगवाएं, जैसा कि उन्होंने पहले ही कर लिया है।

भविष्य में और भी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर की योजना

स्मार्ट मीटरों के जरिए राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इस पहल के बाद, राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना है। इससे जहां एक ओर बिजली की चोरी पर काबू पाया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर, लोगों को भी उनकी खपत के आधार पर सही बिल मिलेगा और वे बिजली बचाने के लिए प्रेरित होंगे।

आखिरकार, क्या ये बदलाव जनता के बीच लोकप्रिय हो पाएंगे?

हालांकि स्मार्ट मीटर की पहल को लेकर विरोधी विचार सामने आ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह कदम राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद करेगा। सरकार ने इसे केंद्र सरकार की योजना के तहत लागू किया है, और इसके फायदे आम जनता को ही मिलेंगे। स्मार्ट मीटर से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर सरकार की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है।