In Uttarakhand, the government will now run 26 hospitals itself, ending the PPP model; how will patients benefit?
उत्तराखंड सरकार ने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (UPHC) के संचालन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 26 ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन अब निजी संस्थाओं के बजाय सरकार अपने हाथों में लेगी। अभी तक ये अस्पताल पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर संचालित हो रहे थे। 30 अक्टूबर को निजी संस्थाओं के साथ उनका अनुबंध समाप्त हो गया है। अब स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से इन केंद्रों का संचालन करेगा।
सोमवार से शुरू होगी हैंडओवर की प्रक्रिया
देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में सोमवार से 26 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सरकार के अधीन लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन केंद्रों का संचालन संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) के स्तर से किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को अलग से बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
दरअसल, इन स्वास्थ्य केंद्रों को PPP मोड पर चलाने के लिए नई एजेंसी के चयन की टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच सरकार ने निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन जारी रखने के बजाय व्यवस्था बदलने का निर्णय लिया। इस संबंध में 29 अक्टूबर को NHM के नोडल अधिकारी ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजकर जानकारी दी थी।
अब सभी 37 स्वास्थ्य केंद्र होंगे सरकारी नियंत्रण में
उत्तराखंड में कुल 37 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से 11 केंद्रों का संचालन पहले से ही सरकार कर रही थी, जबकि 26 केंद्र निजी संस्थाओं के जिम्मे थे। अब नए फैसले के बाद राज्य के सभी 37 UPHC सरकारी नियंत्रण में आ जाएंगे।
इन केंद्रों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर आउटरीच कैंप भी आयोजित किए जाते हैं।
हर दिन 70 से 100 मरीज पहुंचते हैं
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना औसतन 70 से 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं। ऐसे में संचालन व्यवस्था में बदलाव के दौरान मरीजों को नियमित सुविधाएं मिलती रहें, यह स्वास्थ्य विभाग के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।
पुराने डॉक्टर और कर्मचारी ही संभालेंगे जिम्मेदारी
देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, जिले के 12 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन की तैयारी पूरी कर ली गई है। मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पहले से तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों को ही केंद्रों में बनाए रखने की तैयारी है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में कर्मचारियों के साथ बैठक भी की गई है। प्रत्येक केंद्र पर सामान्य तौर पर एक डॉक्टर, पांच एएनएम, एक स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट, एक स्वच्छक और एक वार्ड बॉय या आया की तैनाती रहती है।
निजी संस्था ने टेंडर प्रक्रिया की जांच की मांग की
इस फैसले के बीच निजी संस्था अक्षांश चित्रांश ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संस्था के निदेशक हरीश कुमार टिंकर के मुताबिक, उनकी संस्था देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में 21 केंद्रों का संचालन कर रही थी। उन्होंने दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई स्तरों पर शिकायतें की गईं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
संस्था ने केंद्रों का संचालन वापस लिए जाने और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
फिलहाल सरकार के फैसले के बाद शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन सीधे सरकारी व्यवस्था के तहत होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था में मरीजों को पहले की तरह नियमित स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहती हैं या नहीं।