कराची में 7 महीने से फंसा भारतीय जहाज, छह नाविकों की वापसी का इंतजार, PM से परिवार ने लगाई गुहार

पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर एक भारतीय मालवाहक जहाज पिछले करीब सात महीने से फंसा हुआ है। जहाज पर चीफ ऑफिसर विनीत किशोर मिश्रा समेत छह भारतीय नाविक मौजूद हैं। उनकी घर वापसी नहीं होने से परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी विनीत की पत्नी नेहा अपने दो छोटे बच्चों के साथ दिल्ली पहुंची हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप कर अपने पति समेत सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने की अपील की है।

पति की वापसी के लिए दिल्ली पहुंचीं नेहा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विनीत किशोर मिश्रा अप्रैल से कराची बंदरगाह पर फंसे हुए हैं। परिवार ने पिछले कई महीनों में जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन अब तक उनकी वापसी का रास्ता नहीं निकल पाया है।

लगातार प्रयासों के बावजूद राहत नहीं मिलने पर विनीत की पत्नी नेहा अपने बच्चों के साथ दिल्ली पहुंची हैं। परिवार पहाड़गंज के एक होटल में ठहरा है और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की कोशिश कर रहा है।

नेहा ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय से अपील की है कि उनके पति और जहाज पर मौजूद अन्य भारतीय नाविकों को जल्द सुरक्षित भारत लाया जाए। उनके तीन साल के बेटे वेदांश के बार-बार पिता के बारे में पूछने से परिवार की भावनात्मक परेशानी भी बढ़ रही है। दंपति की एक 10 महीने की बेटी भी है।

जहाज पर बिजली और जरूरी सुविधाओं की कमी का दावा

परिवार के अनुसार, विनीत ने भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर जहाज पर फंसे छह भारतीय नाविकों की स्थिति से अवगत कराया था। उन्होंने जहाज में लंबे समय से बिजली नहीं होने, आवश्यक सामान की कमी और चालक दल के सदस्यों की सेहत बिगड़ने की आशंका जताई थी।

विनीत के मुताबिक, जहाज पर मौजूद भारतीय नाविकों के रोजगार अनुबंध की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वे कई महीने से वापस नहीं लौट पाए हैं। परिवार ने जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

विनीत के पिता ललित किशोर मिश्रा सेना से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि पिछले सात महीने परिवार के लिए बेहद मुश्किल रहे हैं। नेटवर्क उपलब्ध होने पर ही विनीत से कभी-कभार बात हो पाती है और फोन कॉल भी कुछ मिनटों तक ही सीमित रहती हैं।

परिवार के मुताबिक, जहाज में बिजली की समस्या के कारण परिस्थितियां और कठिन हो गई हैं। चालक दल को बंदरगाह प्रशासन की ओर से भोजन उपलब्ध कराए जाने की बात भी सामने आई है।

17 अप्रैल को कराची पहुंचा था जहाज

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय मालवाहक जहाज 17 अप्रैल को कराची बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद करीब 29 अप्रैल से उसे अदालत के आदेश पर हिरासत में रखा गया है। विनीत ने इससे पहले 25 फरवरी को ईरान के बंदर अब्बास के पास समुद्र में जहाज पर अपनी ड्यूटी शुरू की थी।

जहाज पर फंसे नाविकों का आरोप है कि उनके पासपोर्ट और सीफेयरर्स बुक यानी नाविकों की सेवा से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों या जहाज के एजेंट के कब्जे में हैं। उनका कहना है कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण वे अपनी ओर से भारत लौटने की व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं।

हालांकि, जहाज को हिरासत में रखने के कानूनी कारणों और दस्तावेजों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।

पेंशन के सहारे चल रहा परिवार का खर्च

विनीत की पत्नी नेहा के अनुसार, पति के लंबे समय से घर से दूर रहने के कारण परिवार आर्थिक परेशानियों का भी सामना कर रहा है। फिलहाल परिवार का खर्च उनके ससुर की पेंशन से चल रहा है।

परिवार ने बताया कि एक सांसद और एक विधायक की ओर से भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर विनीत की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी गई है। इसके बावजूद अब तक परिवार को कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है।

परिजन उम्मीद कर रहे हैं कि भारत सरकार संबंधित अधिकारियों और राजनयिक माध्यमों से मामले में हस्तक्षेप करेगी। परिवार की मांग है कि कराची बंदरगाह पर फंसे विनीत किशोर मिश्रा और अन्य भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनकी जल्द घर वापसी का रास्ता निकाला जाए।