Questions raised over 60% vs 40% marks in UTET exam; hearing held on petition challenging reservation policy
उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) में आरक्षण और न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्राथमिक शिक्षक संघ ने परीक्षा में आरक्षण की व्यवस्था और अलग-अलग वर्गों के लिए निर्धारित पासिंग मार्क्स पर सवाल उठाते हुए अदालत में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह परीक्षा सेवारत शिक्षकों की पात्रता निर्धारित करने के लिए है, न कि सीधे नौकरी देने के लिए। ऐसे में इसमें आरक्षण और उत्तीर्ण अंकों के अलग-अलग मानकों की व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए। मामले में कोर्ट ने सरकार, शिक्षा विभाग और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
आरक्षण और पात्रता अंकों पर शिक्षक संघ की आपत्ति
प्राथमिक शिक्षक संघ का आरोप है कि UTET में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण तथा अलग-अलग उत्तीर्ण अंकों की व्यवस्था को लेकर विसंगतियां हैं। संघ का कहना है कि सेवारत शिक्षकों को इस परीक्षा के माध्यम से अपनी पात्रता साबित करनी है, इसलिए सभी के लिए समान मानक तय किए जाने चाहिए।
संघ के जिलाध्यक्ष और याचिकाकर्ता धर्मेंद्र रावत के अनुसार, सेवारत शिक्षकों के लिए परीक्षा पास करने के अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने परीक्षा शुल्क में भी विभिन्न वर्गों के बीच अंतर का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों की पात्रता जांचने के लिए एक समान पैमाना होना चाहिए।
सामान्य वर्ग के लिए 60% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% अंक का मुद्दा
संघ के जिलामंत्री रूपक पुरी ने न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों में अंतर पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सामान्य वर्ग के सेवारत शिक्षकों के लिए 60 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के शिक्षकों के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित करने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। उनका सवाल है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की पात्रता का आकलन अलग-अलग अंकों के आधार पर क्यों किया जा रहा है।
शिक्षक संघ इस व्यवस्था को अनुचित बताते हुए सभी के लिए एक समान न्यूनतम अंक तय करने की मांग कर रहा है। हालांकि, आरक्षण और उत्तीर्ण अंकों की वैधता पर अंतिम स्थिति अदालत में सुनवाई और संबंधित नियमों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
महिलाओं और राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण पर भी सवाल
याचिका में राज्य की मूल निवासी महिलाओं के लिए लोक सेवाओं में निर्धारित 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल किया है कि पात्रता परीक्षा में इस व्यवस्था को लागू क्यों नहीं किया गया। इसके साथ ही चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
संघ का कहना है कि जब परीक्षा में कुछ वर्गों के लिए आरक्षण और अलग-अलग उत्तीर्ण अंकों की व्यवस्था है, तो अन्य निर्धारित आरक्षण प्रावधानों पर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
करीब 50 हजार शिक्षकों और अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
29 सितंबर को आयोजित UTET परीक्षा में प्रदेशभर से करीब 50 हजार शिक्षकों और अभ्यर्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें लगभग 20 हजार सेवारत शिक्षक बताए गए हैं। परीक्षा दो स्तरों पर आयोजित की गई थी। UTET प्रथम कक्षा एक से पांच तक पढ़ाने के लिए पात्रता से संबंधित है, जबकि UTET द्वितीय कक्षा छह से आठ तक पढ़ाने के लिए आयोजित की जाती है। कई अभ्यर्थियों ने दोनों परीक्षाएं भी दी हैं।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुभाष झिल्डियाल ने भी सेवारत शिक्षकों के लिए समान न्यूनतम उत्तीर्ण अंक तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि UTET नौकरी देने की परीक्षा नहीं, बल्कि पात्रता साबित करने का माध्यम है। उन्होंने एलटी शिक्षकों के लिए इस परीक्षा की अनिवार्यता पर भी पुनर्विचार करने की बात कही।
अदालत के जवाब के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
प्राथमिक शिक्षक संघ की याचिका के बाद अब सरकार, शिक्षा विभाग और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद को निर्धारित समयसीमा में अपना पक्ष रखना है। मामले में अदालत के सामने आरक्षण के प्रावधानों, उत्तीर्ण अंकों के अंतर और क्षैतिज आरक्षण से जुड़े सवालों पर पक्ष रखे जाने की उम्मीद है। आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा की मौजूदा व्यवस्था में किसी बदलाव की आवश्यकता है या नहीं।