अंकिता भंडारी केस को लेकर सिक्किम में विरोध, दुष्यंत गौतम के शपथ ग्रहण को टालने की मांग

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवाद को लेकर सिक्किम में नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए। सिक्किम बार एसोसिएशन (हाई कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर गौतम के शपथ ग्रहण को स्थगित करने और उनकी नियुक्ति से संबंधित वारंट को फिलहाल रोकने की मांग की थी। हालांकि, इन मांगों के बीच दुष्यंत गौतम ने सोमवार को सिक्किम के 21वें राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली। सिक्किम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर क्या कहा?

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ताशी राप्टेन बुरफुंगपा ने LiveLaw से बातचीत में स्पष्ट किया कि संगठन किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप नहीं लगा रहा है और न ही किसी की दोषसिद्धि को लेकर पहले से कोई निष्कर्ष निकाल रहा है। एसोसिएशन के अनुसार, मामले की जांच करना और किसी की जिम्मेदारी तय करना संबंधित जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। संगठन ने अपनी चिंता को संवैधानिक पद की गरिमा और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा बताया।

एसोसिएशन का कहना था कि राज्यपाल का पद राज्य का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। ऐसे में यदि किसी नियुक्त व्यक्ति को लेकर लगातार सार्वजनिक विवाद बना हुआ है और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है, तो शपथ ग्रहण से पहले स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। संगठन ने कहा कि सिक्किम अपनी शांति, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। उसके मुताबिक, विवाद के बीच नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने से राज्य के संवैधानिक संस्थानों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

अनुच्छेद 361 का भी दिया हवाला

राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में एसोसिएशन ने संविधान के अनुच्छेद 361 का भी उल्लेख किया। संगठन का तर्क था कि राज्यपाल पद की शपथ लेने के बाद संवैधानिक संरक्षण से जुड़े प्रावधान लागू हो जाते हैं, जिससे पद पर रहते हुए आपराधिक कार्यवाही और जांच से संबंधित प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। एसोसिएशन ने आशंका जताई कि यदि विवाद का समाधान होने से पहले शपथ ग्रहण होता है, तो पारदर्शिता और जनता के विश्वास को लेकर संवैधानिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की अपील

बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति से सोमवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को तत्काल स्थगित करने और नियुक्ति वारंट को तब तक लंबित रखने का अनुरोध किया था, जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवाद पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती और सक्षम जांच एजेंसियां दुष्यंत गौतम के संबंध में अपना निष्कर्ष नहीं दे देतीं। हालांकि, एसोसिएशन की अपील के बावजूद गौतम ने राज्यपाल पद की शपथ ले ली।

अंकिता भंडारी की हत्या का मामला वर्ष 2022 का है। इस मामले को लेकर दुष्यंत गौतम का नाम सार्वजनिक चर्चाओं में आने के संबंध में बार एसोसिएशन ने चिंता जताई थी। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी मांग किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक पदों की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सार्वजनिक भरोसे को ध्यान में रखकर की गई थी।