Dhal Singh Bisen has taken the oath as Governor of Uttarakhand; he possesses extensive experience in the politics of Madhya Pradesh.
देहरादून: डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने उत्तराखंड के नौवें राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। लोक भवन में आयोजित समारोह में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ दिलाई। बिसेन ने पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का स्थान लिया है। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए कई दिग्गज नेता
राज्यपाल के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल और डॉ. धन सिंह रावत उपस्थित रहे। इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और भाजपा नेता मदन कौशिक भी समारोह में शामिल हुए।
शपथ लेने के बाद डॉ. बिसेन ने राज्य के विकास, जनकल्याण और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और उम्मीद व्यक्त की कि उनके मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पोते के साथ टहल रहे थे, तभी आया राज्यपाल बनने का फोन
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने अपनी नियुक्ति से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर को वह मध्य प्रदेश के सिवनी शहर स्थित अपने घर पर पोते के साथ टहल रहे थे। इसी दौरान भोपाल से फोन आया, जिसमें उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई।
नियुक्ति की खबर मिलते ही उनके आवास पर समर्थकों और परिचितों का पहुंचना शुरू हो गया। कुछ ही देर में माहौल जश्न में बदल गया। बिसेन की नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से घोषित छह नए राज्यपालों की नियुक्तियों में शामिल थी।
गांव के पंच से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में जन्मे डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने राजनीति की शुरुआत अपने गांव में निर्वाचित पंच के रूप में की थी। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ अपना राजनीतिक सफर आगे बढ़ाया।
बिसेन ने 1990, 1993, 1998 और 2003 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में बरघाट सीट से जीत दर्ज की। बाद में बरघाट सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा ने उन्हें केवलारी से चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि, वह 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल नहीं कर सके।
मध्य प्रदेश सरकार में संभाले कई मंत्रालय
डॉ. बिसेन ने 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने वन, परिवहन और खनिज विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें स्कूल शिक्षा और जेल विभाग का दायित्व भी मिला।
वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम किया। उनके राजनीतिक अनुभव में राज्य सरकार में मंत्री पद के साथ-साथ वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी शामिल रही हैं।
बालाघाट से सांसद बने, 2024 तक लोकसभा में रहे
वर्ष 2019 में भाजपा ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की और 17वीं लोकसभा के सदस्य बने। उन्होंने 2024 तक सांसद के रूप में कार्य किया। इसके बाद भी वह भाजपा की राज्य कार्य समिति से जुड़े रहे।
मध्य प्रदेश की विधानसभा और लोकसभा में काम करने का अनुभव रखने वाले डॉ. बिसेन के सामने अब उत्तराखंड के संवैधानिक प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारी है। राज्यपाल के तौर पर उनकी भूमिका राज्य के संवैधानिक कामकाज, विधायी प्रक्रियाओं और सरकार के साथ संस्थागत समन्वय से जुड़ी होगी।