चंपावत के इस गांव से जुड़ी है शास्त्री जी की खास याद, आज भी निभती है पुरानी परंपरा

उत्तराखंड के चंपावत जिले का गोशनी गांव स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए खास पहचान रखता है। इसी गांव की जागोली धर्मशाला का संबंध देश के पूर्व प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेता लाल बहादुर शास्त्री से बताया जाता है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1934 में अंग्रेजी हुकूमत से बचने के दौरान शास्त्री जी ने इसी धर्मशाला में करीब एक सप्ताह बिताया था। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर गुप्त रणनीति तैयार की थी।

स्वतंत्रता सेनानियों का सुरक्षित ठिकाना थी जागोली धर्मशाला

चंपावत के खेतीखान क्षेत्र स्थित गोशनी गांव की जागोली धर्मशाला को स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण यादों से जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि ब्रिटिश शासन के दौर में यह स्थान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल होता था। लाल बहादुर शास्त्री के अलावा कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने भी यहां शरण ली थी।

शास्त्री जी की जयंती और महात्मा गांधी की जयंती हर साल 2 अक्टूबर को यहां विशेष तरीके से मनाई जाती है। इस अवसर पर प्रभातफेरी निकालने के साथ धर्मशाला में खीर का भोग लगाया जाता है।

1952 में शुरू हुई थी प्रभातफेरी की परंपरा

गोशनी गांव में ऐतिहासिक दिवसों पर प्रभातफेरी निकालने की परंपरा भी कई दशक पुरानी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी 1952 को खेतीखान के बर्नाकुलर स्कूल से गोशनी गांव तक पहली प्रभातफेरी निकाली गई थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दुर्गादत्त ओली ने इसका नेतृत्व किया था।

इस प्रभातफेरी में गोशनी और आसपास के गांवों के युवाओं ने हिस्सा लिया था। इतिहासकार देवेंद्र ओली के अनुसार, उस पहली प्रभातफेरी में सुखदेव ओली, गोपाल दत्त, जोगा राम ओली, बाला दत्त ओली, रूपदेव ओली, दुर्गा दत्त कर्नाटक और गिरधारी लाल वर्मा समेत कई लोग शामिल हुए थे।

2 अक्टूबर को लगाया जाता है खीर का भंडारा

पहली प्रभातफेरी के बाद ऐतिहासिक अवसरों पर प्रभातफेरी निकालने की परंपरा आगे भी जारी रही। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के मौके पर जागोली मंदिर और धर्मशाला समिति की ओर से खीर का भोग लगाया जाता है और भंडारे का आयोजन किया जाता है।

इस तरह गोशनी गांव में स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृतियों के साथ जुड़ी यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। शास्त्री जी से जुड़ी जागोली धर्मशाला आज भी स्थानीय लोगों के लिए इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है।