Power Cut से कब मिलेगी राहत? उत्तराखंड में बिजली संकट पर अफसरों की बैठक उत्तराखंड में एक हफ्ते और बिजली कटौती का संकट

उत्तराखंड में बिजली संकट फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। Power Supply Shortage के कारण प्रदेश के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती जारी है। मौजूदा समय में राज्य में बिजली की मांग करीब 53.66 Million Units (MU) है, जबकि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड यानी UJVN Limited (UJVNL) से लगभग 20.44 एमयू बिजली मिल रही है। उपलब्धता और मांग के बीच अंतर के चलते देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश इलाकों में लोगों को अभी करीब एक सप्ताह और कटौती का सामना करना पड़ सकता है। 26 सितंबर के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

बड़े शहरों से गांवों तक बिजली कटौती

बुधवार को भी प्रदेश के ज्यादातर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में Power Cut देखने को मिला। देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल को फिलहाल इससे राहत मिली हुई है। वहीं रुद्रपुर, हल्द्वानी, ज्वालापुर, काशीपुर और रुड़की जैसे बड़े शहरों में करीब आधे घंटे की कटौती की गई।

छोटे शहरों में लगभग एक घंटे और ग्रामीण इलाकों में करीब दो घंटे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। औद्योगिक क्षेत्र में फिलहाल फर्नेश स्टील इंडस्ट्री को ही अपेक्षाकृत लंबी कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली उत्पादन में आई कमी

UPCL MD पीसी ध्यानी के मुताबिक, जल विद्युत और कोल पावर प्रोजेक्ट्स से उत्पादन प्रभावित होने के कारण बिजली संकट पैदा हुआ है। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में इसका असर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में Power Generation में सुधार होने की संभावना है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल UJVNL से करीब 25 एमयू बिजली उपलब्ध हो रही थी, जबकि इस समय यह घटकर लगभग 20.44 एमयू रह गई है। सभी स्रोतों को मिलाकर राज्य के पास करीब 49 एमयू बिजली उपलब्ध है, जबकि मांग 53.66 एमयू तक पहुंच गई है। यानी करीब 4 Million Units की कमी बनी हुई है।

THDC और केंद्रीय कोटे से भी कम बिजली

बिजली उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की एक वजह THDC Pumped Storage Plant से मिलने वाली बिजली में कमी भी बताई जा रही है। इस बार वहां से करीब 100 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार से मिलने वाले Power Allocation में भी लगभग 100 मेगावाट की कमी बताई गई है।

सभी स्रोतों को मिलाकर इस समय राज्य की बिजली उपलब्धता में करीब 350 MW तक की कमी बताई जा रही है। इसी वजह से मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में रोस्टर के आधार पर बिजली कटौती की जा रही है।

बिजली संकट पर अधिकारियों की बैठक

बिजली संकट को लेकर बुधवार को प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम ने ऊर्जा निगमों के अधिकारियों के साथ बैठक की। सचिवालय में हुई बैठक में Power Crisis Management को लेकर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और मांग के अनुरूप Supply सुनिश्चित करने को कहा गया।

बिजली चोरी वाले क्षेत्रों पर सख्ती के निर्देश

प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को बिजली चोरी और Line Loss वाले क्षेत्रों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बिजली चोरी या अधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों की वजह से नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

ऐसे क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने के साथ ही विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि Regular Electricity Consumers को अनावश्यक कटौती का सामना न करना पड़े।

फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली कटौती का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। विभाग को उम्मीद है कि बिजली उत्पादन और उपलब्धता में सुधार के बाद 26 सितंबर से Power Supply Situation बेहतर हो सकती है।