MBBS Admission में फर्जीवाड़े का आरोप, Dehradun SIT की जांच में कई अहम खुलासे

NEET UG 2025 Admission: देहरादून में फर्जी दस्तावेजों के जरिए MBBS में दाखिला दिलाने के मामले में पुलिस की SIT (Special Investigation Team) ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के अनुसार, तीन अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर फर्जी Freedom Fighter Dependent Certificate तैयार कराए गए और इन्हीं के आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला दिलाने का प्रयास किया गया।

ऐसे सामने आया Fake Certificate का मामला

मामला तब सामने आया जब रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने के क्षेत्रों से अलग-अलग अभ्यर्थियों ने सरकारी पोर्टल पर Freedom Fighter Dependent Certificate बनवाने के लिए Online Application किया। आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेजों की जांच में पुलिस को कई कागजात संदिग्ध मिले।

इसके बाद रायपुर थाने में मुकदमा संख्या 380/26 और क्लेमेंटाउन थाने में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए Dehradun Police ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में SIT गठित की।

दस्तावेजों और पते की हुई जांच

SIT ने मामले से जुड़े Documents को कब्जे में लेकर उनका Verification शुरू किया। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते भी गलत पाए गए। इसके बाद टीम ने संबंधित Educational Institutions में पहुंचकर वहां मौजूद रिकॉर्ड और दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लिया।

दस्तावेजों के Verification के दौरान अभ्यर्थियों के वास्तविक पते और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आई। इसके आधार पर पुलिस ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए रायपुर थाने बुलाया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया।

45 लाख रुपये में MBBS Admission का दावा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में पता चला कि मेरठ निवासी रूपेश पंडित करीब पांच वर्षों से Education Consultancy Business से जुड़ा था। वह मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से कंपनी चलाता था। पुलिस के मुताबिक, वह निजी विश्वविद्यालयों के अलावा विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom जैसे Courses में Commission Based Admission कराने का काम करता था।

हरिद्वार निवासी अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित बताया गया है। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी बेटी परी के MBBS Admission के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके बाद दो अन्य परिचितों के बच्चों के Admission की भी बातचीत हुई।

पुलिस का दावा है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को Freedom Fighter Quota के तहत MBBS में Admission दिलाने की बात कही। प्रत्येक Admission के लिए कथित तौर पर 45 लाख रुपये की रकम तय हुई थी। जांच के अनुसार, तीनों अभ्यर्थियों के परिवारों से 20-20 लाख रुपये Advance Payment के तौर पर लिए गए थे। बाकी रकम Admission और Classes शुरू होने के बाद देने की बात कही गई थी।

Fake Certificate के आधार पर Admission का आरोप

SIT की जांच में पुलिस का आरोप है कि रूपेश पंडित ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के लिए Forged Documents तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर कथित तौर पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार किए गए।

पुलिस के मुताबिक, इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS Admission लिया। अब पुलिस इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और कथित Admission Network की भी जांच कर रही है।