Fear of a Nepal-like disaster! 5 glacial lakes in Uttarakhand highly sensitive; risk rises.
Glacier Lake Alert: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियर झीलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच उत्तराखंड की पांच ग्लेशियर झीलों को Highly Vulnerable यानी अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें चार झीलें नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले में हैं, जबकि एक ग्लेशियर झील चमोली में स्थित है। प्रशासन का कहना है कि इन झीलों की नियमित निगरानी की जा रही है और फिलहाल किसी तत्काल खतरे जैसी स्थिति नहीं है।
देशभर की करीब 200 ग्लेशियर झीलों पर नजर
ग्लेशियर झीलों को लेकर केंद्र सरकार पहले से ही सतर्क है। National Disaster Management Authority (NDMA) ने वर्ष 2024 में देशभर की करीब 200 ग्लेशियर झीलों की सूची तैयार की थी। इनमें ऐसी झीलें शामिल हैं जिन्हें आपदा की दृष्टि से संवेदनशील या अति संवेदनशील माना गया है।
उत्तराखंड भी इस सूची में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य की करीब 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। नेपाल में हालिया आपदा के बाद इन क्षेत्रों की निगरानी और Disaster Preparedness को लेकर एक बार फिर ध्यान बढ़ गया है।
उत्तराखंड में कहां हैं 5 Highly Vulnerable Glacier Lakes?
अति संवेदनशील श्रेणी में शामिल पांचों ग्लेशियर झीलें उत्तराखंड में हैं। इनमें चार झीलें पिथौरागढ़ जिले में नेपाल सीमा के नजदीक स्थित हैं। पांचवीं झील चमोली जिले की वसुधारा Glacier Lake है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य में मौजूद ग्लेशियर झीलों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्राथमिक सर्वेक्षण के आधार पर इन झीलों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और जरूरत के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
क्यों खतरनाक हो रही हैं Glacier Lakes?
विशेषज्ञों के मुताबिक Climate Change और मौसम के बदलते पैटर्न का असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल सकते हैं, जिससे झीलों में पानी का स्तर बढ़ता है।
इसके अलावा भूस्खलन, हिमस्खलन या ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर झील में गिरने से अचानक पानी का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में झील का बांध टूटने पर तेज रफ्तार से पानी और मलबा नीचे की ओर बह सकता है। इसे Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) कहा जाता है। यह निचले इलाकों में अचानक बाढ़ और भारी तबाही का कारण बन सकता है।
तीन झीलों का प्राथमिक सर्वेक्षण पूरा
उत्तराखंड में संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की स्थिति समझने के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब तक तीन झीलों का प्राथमिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है।
पहले चरण में चमोली की वसुधारा ग्लेशियर झील का सर्वे किया गया। इसके बाद पिथौरागढ़ की दो अन्य ग्लेशियर झीलों का भी प्राथमिक सर्वेक्षण पूरा हो गया। बाकी दो झीलों का सर्वेक्षण पहले मई में प्रस्तावित था, लेकिन झीलों के जमे होने के कारण इसे टालना पड़ा। बर्फ पिघलने के बाद सितंबर में इनका सर्वेक्षण कराने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने बढ़ाई निगरानी
नेपाल में आई आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्रों में Early Warning System, निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियों को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील झीलों की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन होने के बाद जरूरत के मुताबिक सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने फिलहाल लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। खासतौर पर पर्वतीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम और प्रशासन की ओर से जारी Weather Alert तथा Disaster Advisory पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
नेपाल में राहत के बीच भारत भी सतर्क
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत समेत कई देशों ने राहत और बचाव दल भेजने की पेशकश की थी। हालांकि नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी बचाव दलों की आवश्यकता नहीं होने की बात कही है। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा राहत अभियान स्थानीय स्तर पर चलाया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे आर्थिक या अन्य सहायता मांगी जा सकती है।
इस बीच भारत में भी नेपाल से लगे हिमालयी क्षेत्रों में Flood Risk और Glacier Lake Monitoring को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम के बीच ऐसी झीलों की नियमित निगरानी और समय रहते चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।