Ethanol Subsidy: एथेनॉल प्रोजेक्ट पर सरकार देगी ब्याज में राहत, जानें कैसे मिलेगा फायदा

Ethanol Subsidy: देश में एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने और Biofuel को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ₹4,687 करोड़ की Interest Subsidy को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ Ethanol Blended Petrol (EBP) कार्यक्रम को और मजबूत करना है।

एथेनॉल पर ₹4,687 करोड़ की Interest Subsidy

राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एथेनॉल सब्सिडी योजना से जुड़ी जानकारी साझा की। सरकार के मुताबिक, इस योजना के तहत पात्र Ethanol Projects को ब्याज में राहत दी जाएगी। सब्सिडी का भुगतान NABARD के माध्यम से किया जाएगा।

सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2022-23 से अब तक NABARD को इस योजना के लिए करीब ₹2,075 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। इसका मकसद एथेनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और देश में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।

5 साल तक मिलेगी Interest Subsidy

सरकारी योजना के तहत पात्र परियोजनाओं को अधिकतम 5 वर्षों तक हर साल 6% तक की Interest Subsidy का लाभ मिल सकता है। हालांकि, यदि बैंक द्वारा लिया जाने वाला ब्याज 6% से कम है, तो सब्सिडी की गणना अलग तरीके से होगी।

ऐसी स्थिति में सरकार बैंक द्वारा लिए जा रहे ब्याज की 50% राशि तक सहायता देगी। आसान भाषा में समझें तो पात्र लाभार्थी को 6% ब्याज या बैंक द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज की 50% राशि में से जो रकम कम होगी, उतनी सब्सिडी मिलेगी।

नई और पुरानी दोनों Distillery को फायदा

Ethanol Subsidy Scheme का लाभ सिर्फ नई यूनिट लगाने वालों तक सीमित नहीं है। नई Distillery स्थापित करने या मौजूदा डिस्टिलरी में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए लिए गए Term Loan पर भी ब्याज सहायता उपलब्ध हो सकती है।

इस योजना के तहत लोन की अदायगी शुरू करने से पहले एक साल की शुरुआती राहत अवधि (Moratorium Period) का प्रावधान भी है। इससे परियोजनाओं को उत्पादन शुरू करने और वित्तीय व्यवस्था को स्थिर करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।

Molasses और Grain से Ethanol बनाने वाली यूनिट शामिल

सरकारी सहायता के दायरे में ऐसी डिस्टिलरी को शामिल किया गया है, जो Molasses (शीरा), Grains (अनाज) या दोनों से एथेनॉल का उत्पादन करती हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग Feedstock से Ethanol Production को बढ़ावा देना है।

इसके अलावा कृषि अवशेष और Biomass से 2G Ethanol बनाने वाली परियोजनाओं को भी सरकार की PM JI-VAN Yojana के तहत वित्तीय सहायता दी जाती है। 2G Ethanol के लिए खेती से निकलने वाले Waste को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

Sugar Mills को भी मिलती है ब्याज में मदद

सरकार एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए Sugar Mills को भी प्रोत्साहित कर रही है। चीनी मिलों को उनके मौजूदा कच्चे माल से एथेनॉल बनाने वाली यूनिट स्थापित या परिवर्तित करने के लिए ब्याज संबंधी सहायता दी जाती है।

इस तरह सरकार का फोकस Ethanol Production Capacity बढ़ाने के साथ-साथ Biofuel Ecosystem को मजबूत करने पर है। इससे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद मिलने की उम्मीद है।