Miyako traveled from Japan to Bageshwar to fulfill her husband's last wish and immersed his ashes in the Saryu River.
Bageshwar News: उत्तराखंड की देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान एक बार फिर देश की सीमाओं से बाहर तक पहुंची है। जापान से बागेश्वर पहुंचीं मियाको केटलेट ने अपने दिवंगत पति रोबर्ट केटलेट की अंतिम इच्छा पूरी की। उन्होंने सरयू नदी के पवित्र तट पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ पति की अस्थियों का विसर्जन किया। इस दौरान परिवार के सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहे।
पति के निधन के चार साल बाद पूरा किया आखिरी वादा
रोबर्ट केटलेट का वर्ष 2022 में Brain Hemorrhage के बाद निधन हो गया था। काफी समय तक इलाज चलने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। पति की मौत के बाद मियाको के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन उन्होंने रोबर्ट की अंतिम इच्छा को नहीं भुलाया।
समय गुजरने के बाद मियाको ने तय किया कि वह हर हाल में अपने पति की आखिरी इच्छा पूरी करेंगी। इसी संकल्प के साथ उन्होंने जापान से भारत और फिर उत्तराखंड के बागेश्वर तक का सफर तय किया।
सरयू तट पर वैदिक मंत्रों के बीच हुआ अस्थि विसर्जन
रविवार को मियाको अपने पति की अस्थियां लेकर बागेश्वर पहुंचीं। मंदिर परिसर के समीप पुजारी की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुआ। करीब 45 मिनट तक Vedic Rituals और मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई।
इसके बाद मियाको ने अपने पति रोबर्ट की अस्थियां पवित्र सरयू नदी में प्रवाहित कीं। अस्थि विसर्जन के दौरान वह बेहद भावुक नजर आईं और उनकी आंखें नम हो गईं। परिवार के सदस्यों ने भी इस भावुक पल में उनका साथ दिया।
जापान से बागेश्वर तक का सफर बना प्रेम की मिसाल
मियाको की यह यात्रा केवल हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह Love, Faith and Last Wish की भावुक मिसाल बन गई। पति के निधन के वर्षों बाद भी उनकी अंतिम इच्छा को याद रखना और उसे पूरा करने के लिए जापान से उत्तराखंड पहुंचना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
बताया जाता है कि मियाको का घरेलू नाम ताओमी है। अमेरिका से जुड़े रोबर्ट और जापान में रहने वाली मियाको की कहानी अब बागेश्वर से भी जुड़ गई है।
सरयू की धारा में विलीन हुईं अस्थियां
बागेश्वर की पवित्र सरयू नदी में रोबर्ट की अस्थियों के विसर्जन के साथ मियाको ने अपने पति की अंतिम इच्छा पूरी कर दी। यह पल उनके लिए भावनात्मक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा।
Devbhoomi Uttarakhand की आध्यात्मिक आस्था और धार्मिक परंपराएं एक बार फिर ऐसी कहानी का हिस्सा बनीं, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। जापान से बागेश्वर तक मियाको का यह सफर बताता है कि सच्चे रिश्तों की भावनाएं दूरी और समय की सीमाओं से परे होती हैं।