उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल हादसा: शॉटक्रीट लाइनिंग गिरने से श्रमिक की मौत, NHIDCL ने शुरू की जांच

उत्तराखंड के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले में निर्माणाधीन Silkyara Tunnel में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया। टनल के भीतर Shotcrete Lining (कंक्रीट लाइनिंग) का एक हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया, जिसकी चपेट में आने से झारखंड निवासी 21 वर्षीय श्रमिक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया।

टनल के अंदर 900 मीटर पर हुआ हादसा

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसा बड़कोट साइड से करीब 900 मीटर अंदर हुआ, जहां नियमित निर्माण कार्य चल रहा था। अचानक लाइनिंग का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरने से वहां काम कर रहे श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। साथी कर्मचारियों ने घायल श्रमिक को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही बड़कोट पुलिस, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बड़कोट कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुभाष चंद्र ने बताया कि मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

NHIDCL करेगी विस्तृत जांच

हादसे के बाद National Highways and Infrastructure Development Corporation Limited (NHIDCL) ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए Fact Finding Report तैयार की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खामी, निर्माण प्रक्रिया या किसी अन्य कारण से हुआ।

जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्या ने घटना को गंभीर बताते हुए उपजिलाधिकारी बड़कोट को तुरंत मौके पर भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्माण एजेंसी द्वारा अपनाए जा रहे Safety Standards, कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था और हादसे के कारणों की गहन जांच करने के आदेश दिए हैं। साथ ही पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और अन्य श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

2023 का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन फिर आया याद

सिलक्यारा टनल पहले भी देशभर में चर्चा का विषय रह चुकी है। 12 नवंबर 2023 को इसी टनल का एक हिस्सा ढह जाने से 41 मजदूर भीतर फंस गए थे। Char Dham All Weather Road Project के तहत चल रहे इस निर्माण कार्य में देश के सबसे बड़े Rescue Operation में से एक चलाया गया था और करीब 17 दिनों की मशक्कत के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल

ताजा हादसे के बाद स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने निर्माण कार्य में अपनाए जा रहे Construction Safety Protocols पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू करने की मांग की है। अब सभी की नजर NHIDCL Investigation Report पर टिकी है, जिससे हादसे के वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे।