Claim of 15,000 votes being deleted in Khanpur? MLA's video regarding 'SIR' sparks an uproar.
उत्तराखंड में Special Intensive Revision (SIR) के बाद जारी हुई नई Voter List ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान करीब 8.26 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सबसे अधिक नाम उन चार जिलों—देहरादून, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और अल्मोड़ा—से हटे हैं, जहां राज्य की लगभग आधी विधानसभा सीटें आती हैं। ऐसे में राजनीतिक दल अब इस बदलाव के संभावित चुनावी असर का आकलन करने में जुट गए हैं।
इन चार जिलों में सबसे ज्यादा नाम हुए कम
नई मतदाता सूची के अनुसार सबसे अधिक नाम देहरादून, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और अल्मोड़ा जिलों से हटाए गए हैं। इन चारों जिलों में मिलाकर राज्य की लगभग 50 प्रतिशत विधानसभा सीटें आती हैं। अनुमान है कि इन जिलों से ही करीब 5.49 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर कुछ हजार या सैकड़ों वोटों का रहता है, वहां यह बदलाव चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
आखिर क्यों हटाए गए इतने नाम?
निर्वाचन विभाग के अनुसार वर्ष 2003 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर SIR अभियान चलाया गया। इस दौरान कई ऐसे नाम सामने आए जो वर्षों से अपडेट नहीं हुए थे। इनमें मृत मतदाता, दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोग, डुप्लीकेट एंट्री और ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका सत्यापन नहीं हो सका। इसी प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
हटाए गए मतदाताओं की प्रमुख वजहें
निर्वाचन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में नाम विभिन्न कारणों से हटाए गए। इनमें मृत मतदाताओं के अलावा दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके लोग, सत्यापन के दौरान अनुपलब्ध मतदाता तथा डुप्लीकेट रिकॉर्ड शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सवा लाख से अधिक नाम मृत्यु, डेढ़ लाख से अधिक स्थानांतरण या अनुपलब्धता, जबकि साढ़े चार लाख से ज्यादा नाम सत्यापन में पुष्टि न होने के कारण सूची से हटाए गए।
किस पार्टी पर पड़ सकता है असर?
राजनीतिक नजरिए से यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि Voter List Revision का फायदा या नुकसान किस दल को होगा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इन चार प्रमुख जिलों की 36 सीटों में से 20 सीटों पर BJP ने जीत दर्ज की थी। वहीं कई सीटें ऐसी थीं जहां जीत का अंतर बेहद कम था। ऐसे में यदि हटाए गए मतदाताओं का प्रभाव किसी खास क्षेत्र या वर्ग में अधिक रहा, तो 2027 के चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसका सीधा फायदा या नुकसान किसी एक दल को ही होगा।
SIR के बाद जिलेवार बदलाव
SIR के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार मतदाता संख्या में सबसे अधिक कमी इन जिलों में दर्ज की गई—
देहरादून – 13.51%
उधम सिंह नगर – 13.33%
अल्मोड़ा – 10.52%
हरिद्वार – 9.46%
2027 चुनाव पर रहेगी सबकी नजर
उत्तराखंड में कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां हर चुनाव में बेहद कम अंतर से परिणाम तय होते हैं। ऐसे में Updated Voter List, SIR Uttarakhand, Election 2027 और Booth Management जैसे मुद्दे आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक दल अब नए मतदाताओं को जोड़ने और अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं।