Breaking News: Congress said – an attempt to weaken democracy
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्यों ने Delimitation (परिसीमन), SIR (Summary Intensive Revision) और One Nation One Election (ONOE) जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये सभी कदम देश की राजनीति में BJP dominance को मजबूत करने के लिए एक planned political strategy का हिस्सा हैं।
रविवार को दिए गए बयान में CWC सदस्यों ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई “Save Constitution Campaign” के तहत जारी रहेगी और लोकतंत्र को कमजोर करने की हर कोशिश का विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने हाल ही में एक बड़े राजनीतिक कदम को रोकने में सफलता हासिल की है, जिसे वे “controversial delimitation move” मानते हैं।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले I.N.D.I.A. alliance ने 17 अप्रैल को लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन बिल को एकजुट होकर खारिज कर दिया। यह बिल लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और 2011 Census-based delimitation लागू करने से जुड़ा था। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रस्ताव के जरिए सीटों में करीब 50% की बढ़ोतरी कर राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
प्रधानमंत्री द्वारा इस बिल के पास न होने पर विपक्ष की आलोचना किए जाने के बाद सियासत और तेज हो गई। सरकार ने विपक्ष पर women reservation को रोकने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने पलटवार करते हुए पूछा कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 को लागू करने में देरी क्यों की गई। विपक्ष ने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों में ही 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार यह जानते हुए भी बिल लाई कि उसके पास लोकसभा में two-thirds majority नहीं है। उनके अनुसार, यह केवल political credit लेने की कोशिश थी।
CWC सदस्य बीके हरि प्रसाद ने कहा कि Delimitation, SIR और ONOE अलग-अलग सुधार नहीं हैं, बल्कि ये electoral system को प्रभावित करने वाले interconnected steps हैं। उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य fair representation को कमजोर करना और एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें BJP का स्थायी राजनीतिक प्रभाव बना रहे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई राज्यों में voter list revision (SIR process) के दौरान लाखों लोगों के नाम हटाए गए, जिससे उनका voting rights प्रभावित हुआ। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और लोगों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
हरि प्रसाद ने कहा कि 2024 के आम चुनावों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया, जिसे उन्होंने “vote exclusion issue” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी।
वहीं, One Nation One Election (ONOE) पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब वर्तमान में कुछ राज्यों में भी चुनाव एक साथ नहीं कराए जा सके, तो पूरे देश में इसे लागू करना व्यावहारिक नहीं लगता।
कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह ने भी यही आरोप दोहराते हुए कहा कि ये सभी कदम BJP को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहा “Samvidhan Bachao Abhiyan” लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जारी रहेगा।
उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां delimitation और voter list revision ने कई सवाल खड़े किए हैं और इससे सत्ताधारी गठबंधन को लाभ मिला है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन की भी आलोचना की और कहा कि “address to the nation” जैसे मंच का उपयोग राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि सरकार को inflation, unemployment, LPG crisis जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
अंत में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे को भी राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि कांग्रेस ने पहले भी women reservation in local bodies लागू किया था और भविष्य में संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।